लोकसभा चुनाव को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए जहां प्रशासन जोर-शोर से लगा हुआ है, वहीं, हजारों कर्मचारियों को लाखों रुपये खर्च विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण देकर उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया जा रहा है।
कर्मचारी अपने काम को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं, इसका ताजा प्रमाण उनकी कार्यक्रमों में दिखाई जाने वाली सक्रियता से साबित होता है। बुधवार को सभी पोलिंग स्टेशनों के इंचार्ज, मतदान केंद्रों में लगाए कर्मचारियों की अंतिम रिहर्सल में भी पहुंचने में गंभीरता नहीं दिखाई।
सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सुबह 9 बजे बुलाया गया था लेकिन 11 बजे के बाद ही प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो पाया। इतना ही नहीं, 12 बजे तक भी कर्मचारियों का आना जारी था। इससे साबित होता है कि वे अपने काम के प्रति कितने गंभीर हैं।
जिलेभर से विभिन्न विभागों के दो हजार से अधिक कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगा गई है। इनमें पहले ही कर्मचारियों की लेटलतीफी के चलते समय पर कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया, वहीं, कई कर्मचारी अनुपस्थित रहे।
हालांकि निर्वाचन कार्यालय इनसे स्पष्टीकरण लेगा लेकिन जिनके कंधों पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी हो, वे अपने काम के प्रति कितने गंभीर हैं और लोगों की कितनी मदद करेंगे, इसका प्रमाण फाइनल रिहर्सल में देखने को मिला।
एक ओर जहां राजकीय महिला महाविद्यालय भोड़ियाखेड़ा में एसडीएम और चुनाव अधिकारी कर्मचारियों को मतदान के बारे में जानकारी दे रहे थे, वहीं, कुछ कर्मचारी बाहर घूम रहे थे।
उन्हें तो सिर्फ मतदान के लिए दिए जाने वाले अपने सामान प्राप्त करने का इंतजार था। एसडीएम कर्मचारियों को लोगों को मतदान करते वक्त क्या सावधानी बरतनी है, मतदाताओं के वोट खारिज नहीं हो, इसके लिए कैसे करना है,
आदि बिंदुओं को समझा रही थीं, लेकिन कुछ कर्मचारियों को शायद इससे कहीं ज्यादा जानकारी थी, इसलिए वे प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के बजाय औपचारिकताएं ही निभा रहे थे।