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मिलावट पर ध्यान नहीं, दो साल में 249 सैंपलों की रिपोर्ट में 84 मिले फेल, अब नाममात्र सैंपलिंग

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खाद्य पदार्थ हमारी सेहत के लिए कितने ठीक हैं और कितना नुकसानदायक है इसको लेकर न हम जागरूक हैं और न ही अधिकारी गंभीर है। बाजार में जो दूध, घी, सरसों का तेल, रिफाइंड यहां तक कि मसाले बिक रहे हैं वह स्वास्थ्य को खराब कर रहे हैं। खाद्य पदार्थों के जो सैंपल लेकर जांच करवाई जा रही है उसमें 33 फीसदी सैंपल फेल मिल रहे हैं। ये खुद औषधि एवं खाद्य प्रशासन विभाग की रिपोर्ट बता रही है। ये भी सच है कि विभाग सिर्फ नाममात्र सैंपलिंग कर रहा है।
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लॉकडाउन में छूट के बाद खाद्य पदार्थों की दुकानें खुल चुकी हैं यहां पर पहले से रखा पैकिंग फूड बेचा जा रहा है इसको लेकर विभाग के अधिकारी फील्ड में नहीं निकले हैं। चेकिंग तक नहीं हुई है। जबकि ये फूड प्वॉयजनिंग का कारण बन सकते हैं। जानकर हैरानी होगी जिले में इस साल मई माह तक नाममात्र ही सैंपलिंग हुई है। मात्र 20 सैंपल ही लिए गए हैं। अधिकारी इसके पीछे कारण चंडीगढ़ और करनाल की लैब लंबे समय तक बंद रहना बता रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2019 से लेकर अब तक 249 सैंपलों की रिपोर्ट आई है इसमें 84 सैंपल फेल पाए गए हैं।
पिछले दो सालों में ये सैंपल पाए गए फेल
वर्ष सैंपल लिए रिपोर्ट आई पास फेल
2019-20 167 152 109 43
2020- 21 70 97 56 41
2019 से पहले ये सैंपल पाए जा चुके फेल
वर्ष लिए गए सैंपल सब स्टैंडर्ड मिस ब्रांड अनसेफ रिपोर्ट पेंडिंग
2015 98 10 1 2 0
2016 82 11 8 1 0
2017 90 20 18 4 5
2018 180 35 22 4 14
देसी घी तक के सैंपल मिल रहे फेल
सेहत बनाने के लिए लोग देसी घी का प्रयोग करते हैं। सब्जी बनाने में इसका प्रयोग होता है लेकिन ये नहीं पता है कि ये सेहत के लिए सही नहीं है। विभाग की टीम ने पिछले साल 20 मार्च को पुराना बस स्टैंड के पास सिरसा से हिसार जा रहे थ्री व्हीलर में एक क्विंटल 12 किलो घी पकड़ा था। टीम ने पांच सैंपल लिए थे और जांच के लिए भेजे थे। जांच में पांचों सैंपल मिस ब्रांड और सब स्टैंडर्ड मिले हैं। देसी घी बिना गुणवत्ता और बिना लाइसेंस के बेचा जा रहा था। जांच में ये भी पाया गया था कि एप्लीकेशन नंबर को एफएसएसएआई नंबर बनाया हुआ था।
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दुकानदार लाइसेंस नहीं ले रहे और गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रख रहे
2019 में 14 सैंपल सब स्टैंडर्ड पाए गए, 25 मिस ब्रांड मिले और चार अनसेफ पाए गए। अनसेफ यानी की खाने लायक नहीं थे। मिस ब्रांड यानी बिना लाइसेंस के बिक रहा था। सब स्टैंडर्ड यानी की नियम के मुताबिक गुणवत्ता नहीं मिली। अप्रैल 2020 से लेकर अब तक जो रिपोर्ट आई है उसके मुताबिक 24 सैंपल सब स्टैंडर्ड और 14 मिस ब्रांड मिले हैं। इसके अलावा तीन सैंपल अनसेफ पाए गए हैं।
कोट
लैब किन्हीं कारणों से बंद थी और इसके बाद लॉकडाउन लग गया। अभी सैंपलिंग शुरू की गई है। सरसों के तेल को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा पैकिंग सामान को लेकर भी हम जांच कर रहे हैं। लोगों से अपील है कि वह खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का ध्यान रखें और कहीं कोई कमी दिखती है तो इसकी शिकायत विभाग का दें।
- सुरेंद्र पूनिया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
कोट
अगर हम खराब खाद्य पदार्थ खाते हैं तो पेट दर्द और फूड प्वॉयजनिंग होने का खतरा रहता है। पाचन शक्ति पर असर पड़ता है। पैकिंग फूड का प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। गर्मी के मौसम में खाद्य पदार्थ जल्द खराब हो जाते हैं, जो कि खाने में नुकसानदायक होते हैं। ये हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर बना देते हैं। इसलिए पैकिंग फूड का प्रयोग करते समय सावधानी बरतें, उसके निर्माण और खराब होने की तारीख की जरूर जांच कर लें।
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- डॉ. मनीष टुटेजा, फीजिशियन।
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