फतेहाबाद। जिले में नीलगायों की बढ़ती तादाद से किसानों की फसलें खतरे में हैं। झुंड में आने वाली नीलगायें खेतों की लहलहाती फसलें चट कर देती हैं जिससे महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ये नीलगाय खासकर गेहूं, सरसों, मटर और सब्जियों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रही हैं।
इस कारण से किसान दिन-रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं लेकिन इसके बावजूद फसल बचाना मुश्किल साबित हो रहा है। किसान रूपराम, रणवीर, अमर सिंह और रमेश ने बताया कि नीलगायों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शाम ढलते ही ये झुंड के रूप में खेतों में प्रवेश कर फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा देती हैं।
फसलों के बचाने के लिए लगाए गए कांटेदार तार, करंट की तार और अस्थायी बाड़ों को भी ये आसानी से पार कर खेतों में घुस जाती हैं। कई जगह नीलगाय खेतों के साथ-साथ मेढ़ और पौधशालाओं को भी नुकसान पहुंचा रही हैं। किसान इस समस्या से गंभीर रूप से परेशान हैं और प्रशासन से नीलगाय नियंत्रण और सुरक्षा उपाय अपनाने की उम्मीद कर रहे हैं ताकि उनकी फसलों और आर्थिक नुकसान को रोका जा सके।
सफेदा और गन्ने के पौधों को तोड़ रही हैं नीलगाय
गांव रामसरा के किसान विपिन, दलीप और हरि सिंह ने बताया कि नीलगाय क्लोन सफेदे के तने को खा जाती है जिससे पौध कमजोर होकर टूट जाता है। वहीं नीलगाय गन्ने की फसल में रहती है इससे गन्ना बीच में टूट जाता है। क्षति के चलते फसल की लागत तक निकालना मुश्किल हो गया है। पहले से महंगे बीज, खाद और कीटनाशकों की मार झेल रहे किसानों पर अब नीलगायों की आफत दोहरी मार बनकर टूट रही है। किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
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:: जिन गांवों में नीलगाय की संख्या अधिक है या ज्यादा नुकसान हो रहा है। उस क्षेत्र के किसान अगर पंचायती तौर पर लिखित शिकायत देता है तो विभाग नीलगाय पकड़ने या नियंत्रित करने का प्रयास करेगा।
- जयदीप नेहरा, वन्य जीव संरक्षण अधिकारी, फतेहाबाद।
गांव बड़ोपल के क्षेत्र में घूमति नीलगाय। फाइल फोटो