कर्मचारियों की मांग है कि सरकार उन्हें पॉलिसी बनाकर नियमित करे और वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए। आयुष्मान भारत योजना के तहत सीएचओ कैडर की एसओपी को लागू किया जाए। बॉन्ड प्रथा को समाप्त किया जाए। एनएचएम में कार्यरत जिन-जिन कर्मचारियों पर ड्रेस कोड लागू किया गया है उन्हें वर्दी भत्ता, धुलाई भत्ता दिया जाए।
एनएचएम कर्मचारियों द्वारा सेवा नियम व रेगुलर कर्मचारी का दर्जा देने सहित अन्य मांगों को लेकर 19वें दिन भी कामकाज ठप्प कर हड़ताल पर रहे। मंगलवार को एनएचएम कर्मचारियों ने शहर में प्रदर्शन किया और हाथ कटोरी लेकर भीख मांगी। एनएचएम कर्मचारियों की लंबी हड़ताल के कारण जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने से परेशान लोग भी अब सरकार से कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी मांगों को पूरा करने की अपील करने में लगे हैं।
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एनएचएम सांझा मोर्चा का कहना है कि सरकार सर्विस बायलॉज के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करें और कर्मचारियों की मांगों पर जल्द विचार करे। ऐसा नहीं किया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। वहीं, एनएचएम सांझा मोर्चा के नेता एवं स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन शर्मा ने कहा कि हड़ताल की वजह से मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक गांवों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो गई है।
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इसके लिए सरकार व अधिकारियों का अडिय़ल रवैया जिम्मेवार है। एनएचएम कर्मचारी काम पर लौटना चाहते हैं लेकिन अपनी मांगों को पूरा होने के बाद लेकिन सरकार कर्मचारियों से बातचीत कर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा रही है, जिससे खफा कर्मचारी हड़ताल को लंबा करने पर मजबूर है। उनकी मांग है कि सरकार मरीजों की भलाई को देखते हुए कर्मचारियों की लंबित मांगों को पूरा करे।
कर्मचारियों की मांग है कि सरकार उन्हें पॉलिसी बनाकर नियमित करे और वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए। आयुष्मान भारत योजना के तहत सीएचओ कैडर की एसओपी को लागू किया जाए। बॉन्ड प्रथा को समाप्त किया जाए। एनएचएम में कार्यरत जिन-जिन कर्मचारियों पर ड्रेस कोड लागू किया गया है उन्हें वर्दी भत्ता, धुलाई भत्ता दिया जाए। कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर समयाविधि में बढ़ी हुई सीएल, ईएल व सीसीएल प्रदान की जाए और नियमित कर्मियों की तर्ज पर सभी एनएचएम कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा दी जाए।