स्वच्छता सर्वेक्षण जारी हो चुका है। जिले के दोनों पड़ोसी हिसार-सिरसा इसमें शामिल हैं। हम इसमें शामिल नहीं हो सके, कारण क्योंकि हमारे जिले की जनसंख्या उस मानक को पूरा नहीं करती, जिस पर यह पैमाना तय होना था। लेकिन अगले सर्वेक्षण तक फतेहाबाद शहर के भी इसमें शामिल होने की पूरी संभावना है। ऐसे में शुरुआत से ही फतेहाबाद शहर को स्वच्छता की ओर ध्यान देना होगा ताकि सर्वेक्षण की सूची में हम सम्मान जनक स्थिति पर पहुंच सके। इस महत्वपूर्ण जिम्मेवारी में विभागीय अधिकारियों और आम लोग दोनों को गंभीरता दिखानी होगी।
स्वच्छता मिशन के प्रदेश उपाध्यक्ष ने जताई थी नाराजगी
इस बारे में स्वच्छता मिशन के प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र ने अपने फतेहाबाद दौरे के दौरान अधिकारियों और मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि फतेहाबाद शहर की स्थिति स्वच्छता के मामले में संतोषजनक नहीं है। लेकिन नगर परिषद प्रधान दर्शन नागपाल इससे विचलित नहीं हैं। उन्होंने दावा किया है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में जब भी फतेहाबाद शामिल होगा, तब फतेहाबाद की रैंकिंग प्रदेश में सबसे बेहतर होगी। इसके लिए वो शनिवार से सफाई अभियान चलाने की बात कर रहे हैं।
दो साल बाद भी कचरा प्रबंधन प्लांट को लेकर अभी तक कागजी कार्यवाही भी पूरी नहीं
भूना में बनाए जाने वाले कचरा प्रबंधन प्लांट की घोषणा को दो साल से अधिक हो चुका है, लेकिन बावजूद इसके निर्माण शुरू होना तो दूर, इसको लेकर कागजी कार्यवाही अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। अभी भी इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। बीते दिनों फतेहाबाद पहुंचे स्वच्छ भारत मिशन के उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र ने इस संदर्भ में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जब तक कचरा प्रबंधन प्लांट का काम शुरू नहीं होता, तब तक कचरे के लिए दूसरे विकल्पों का प्रयोग किया जाए।
जगह-जगह लोकल डंपिंग प्वाइंट, तीन-तीन घंटे तक खुले में पड़ा रहता कचरा
शहर को स्वच्छ रखने के लिए कचरे को सही ढंग से डालना, उसके बाद कर्मचारियों द्वारा सही ढंग से उठाना और इसके बाद उस कचरे का सही ढंग से प्रबंधन सबसे ज्यादा जरूरी है लेकिन फतेहाबाद में इन तीनों ही स्तरों पर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। फतेहाबाद में कचरा घर से लेने के लिए नगर परिषद की गाड़ी आती है, लेकिन गलियों से इकट्ठा हुआ कचरा कॉलोनी की ही किसी एक सड़क पर बनाए गए अस्थाई डंपिग प्वाइंट पर फेंक दिया जाता है। इसके बाद लगभग दो-तीन घंटे तक ये कचरा सड़क पर खुले में पड़ा रहता है और इसके बाद ट्राली में कर्मचारी आकर इसे ले जाते हैं। लेकिन बाईपास के पास हुडा सैक्टर को नगर परिषद ने डंपिंग यार्ड बना रखा है लेकिन नगर परिषद कर्मचारियों की लापरवाही के चलते डंपिंग यार्ड में गिराया जाने वाला कचरा सड़क किनारे ही पड़ा रहता है। अब बाईपास से गुजरने वाले लोगों के लिए ये अपने-आप में शहर की अंदरूनी सफाई व्यवस्था जांचने के लिए पैरामीटर बन जाता है।
डंपिंग यार्ड तो छोड़िए, प्रतिबंध के बावजूद शहर में ही जला रहे कचरा
कचरा जलाने को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन डंपिंग यार्ड पर तो रोजाना सैकड़ों क्विंटल कचरे को जलाया ही जाता है। कई जगह तो हालात इतने बुरे हैं, शहर के अंदर बने डंपिग प्वाइंट पर ही कचरे को जला दिया जाता है। शुक्रवार को अमर उजाला’ की पड़ताल में सामने आया कि शहर के बीचोंबीच स्थित एमसी कॉलोनी के मोड़ पर रखे गए कूड़ेदान में ही कचरा जला दिया गया। इसके अलावा मॉडल टाऊन में एमएम कॉलेज रोड पर भी कूड़ेदान में डाला कचरा उठाने की बजाए वहीं जला दिया गया।
ये अच्छे कदम हैं जिन्हें नगर परिषद अपनाने जा रही है ।
1. घर-घर से कचरा उठाने के लिए ट्रॉलियों की संख्या बढ़ाई जाएंगी।
2. प्रत्येक घर को नगर परिषद की ओर से दो कूड़ेदान मिलेंगे, एक सूखे कचरे और दूसरे गीले कचरे के लिए।
3. सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए उपायुक्त को प्रस्ताव भेजा गया है।
4. आवारा सांडों के लिए 15 कर्मचारी अतिरिक्त लिए, पहले ये काम सफाई कर्मचारी करते थे
5. शहर में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए टाटा-एस, ट्रैक्टर आदि लेने का प्रस्ताव पास हो चुका है।
सीधी बात : दर्शन नागपाल, चेयरमैन, नगर परिषद
प्रश्न : स्वच्छता के मामले में कब तक पिछड़ते रहेंगे
उत्तर : स्वच्छता हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संभव प्रयास किए जाएंगे।
प्रश्न : दो कूड़ेदान बांटने और कचरे को जलाने से रोकने के लिए क्या प्रयास होंगे।
उत्तर : ये दोनों ही काम प्रस्तावित हैं। फिलहाल ईओ का पद खाली है, ईओ के आते ही ये काम जल्द शुरु हो जाएंगे।
प्रश्न : नगर परिषद प्रधान और पार्षदों का सफाई में क्या योगदान रहेगा।
उत्तर : मैं खुद और सभी पार्षद अपने-अपने वार्ड में सफाई का ध्यान रखेंगे। हम इस बारे में शनिवार को एक विशेष सफाई अभियान के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
युवाओं ने ये दिए सुझाव
जब तक कर्मचारियों द्वारा सफाई करने का तरीका नहीं बदलेगा, तब तक सफाई को लेकर फतेहाबाद इंदौर जैसा स्थान नहीं प्राप्त कर सकता। सफाई एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और इसके लिए अधिकारियों और नागरिकों को लगातार प्रयास करने होंगे। फिलहाल तो हमारे शहर की बुनयादी व्यवस्था ही ठीक नहीं है।
सुमित सेठी, निवासी फतेहाबाद ।
सफाई के लिए हमें खुद भी जागरूक होना होगा। अभी भी शहर में कई लोगों को कूड़ेदान में कचरा डालने की आदत नहीं है। वे गली में ही सारा कचरा डाल देते हैं। अगर सफाई कर्मचारी ने उठा लिया तो ठीक, नहीं तो हालात लगातार बिगड़ते जाते हैं। अधिकारी भी इस ओर गंभीरता से काम करें तो हालात बदलना बहुत मुश्किल भी नहीं हैं।’
विकास टुटेजा, निवासी एमसी कॉलोनी, फतेहाबाद।