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प्लाट के दाम गिरे तो मैटीरियल के दाम बढ़े, महंगा हुआ सपनों का आशियाना

Fri, 05 May 2017 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
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नोटबंदी के बाद प्लाटों के दाम गिरे हुए हैं। दाम में कुछ कमी देखकर अपने सपनों के आशियाने को हकीकत रूप देने की सोच रहे अब लोगों को सामने एक नई मुसीबत आ खड़ी हुई है। कारण है बिल्डिंग मैटीरियल के दामों का बढ़ना।
पिछले दिनों सरकार द्वारा ओवरलोड वाहनों पर सख्ती किए जाने के बाद भवन निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के दाम एकाएक 30 से 40 फीसदी बढ़ गए हैं। जिस मकान को बनाने में पूर्व में 12 लाख रुपये (अनुमानित) खर्च आते थे, अब उसी मकान की निर्माण लागत बढ़कर 15 लाख के (अनुमानित) करीब हो गई है।
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दामों के बढ़ने के कारण बिल्डिंग मैटीरियल विक्रेताओं के यहां भी मंदी का दौर चल निकला है। भवन निर्माण सामग्री के तेजी से उछाल आने का मुख्य कारण यही है कि ट्रांसपोर्टर अब वाहनों को अंडर लोड ही चला रहे हैं। जिसके कारण वे पहले की तुलना में कम सामान ढो रहे हैं। सप्लायर और ट्रांसपोर्टर ने अपने-अपने रेट निर्धारित कर दिए हैं। पहले एक ट्रक चालक अपने ट्रक में पहले छत्तीस टन रेता ले आता था, लेकिन अब वो महज 15 ट्रन रेता ही ले आ रहा है। खानक से लेकर फतेहाबाद आने तक पहले प्रति फुट सात रुपये किराया भाड़ा पड़ता था जो अब बढ़कर 13 रुपये प्रति फुट हो गया है। यानी कि ट्रक चालक पहले से आधा सामान ला रहे हैं, जिसकी भरपाई भी अब आमजन को करनी पड़ रही है।

प्रदेश सरकार द्वारा ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा कसने के बाद रेता-बजरी, क्रैशर, सरिया, सीमेंट सहित सभी प्रकार के बिल्डिंग मैटीरियल के दामोंमें एकाएक वृद्धि हो गई है। चालान के भय से ट्रांसपोर्टर अंडर लोड वाहन चला रहे हैं। महीने भर में ही बिल्डिंग मैटीरियल के दामों में 40 फीसदी का इजाफा हो गया है। ओवरलोड ने लोगों का बजट बिगाड़कर रख दिया है।

निर्माण सामग्री के यूं बढ़े दाम
पहले        अब के दाम
बजरी     26रुपये    33 रुपये
रेता        24 रुपये    35 रुपये
सरिया    33 रुपये    45 रुपये
सीमेंट    280 रुपये    330रुपये
क्रैशर    28 रुपये   36 रुपये
ये सभी सामान प्रति फुट की दर से हैं। सीमेंट प्रति बैग की दर से है।

दाम बढ़ने के कारण हजार फुट की बजाए तीन सौ फुट की ही आवक
बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर मदन मेहता बताते हैं कि रेता-बजरी-क्रैशर और अन्य सामानों के दामों का बढ़ने का कारण ओवरलोड पर शिकंजा कसा जाना है। अंडरलोड के तहत गाड़ी में 15 टन माल ढुलाई कर सकते हैं जबकि ओवरलोड के करीब ये 40 टन प्रति ट्रक के करीब चल रहा था। एक गाड़ी प्रतिदिन एक ही चक्कर माल ढुलाई कर सकती है। जबकि अब इसी माल को तीन चक्करों में उठाने से ट्रांसपोर्ट का किराया तीन गुणा बढ़ गया है। इसका खर्च निर्माण सामग्री से ही निकाला जा रहा है। पहले रेता 900 से 1000 फुट आ जाती थी, अब उसी ट्रक में महज 300 फुट रेता ही आ रही है।

क्या कहना है लोगों का
बिल्डिंग ठेकेदार सूरजभान ने बताया कि 120 गज जगह में ग्राउंड फ्लोर पर मकान बनाने में तकरीबन 10 लाख रुपये के करीब खर्च आता था, रेट बढ़ने के बाद अब ये एस्टीमेट बढ़कर 13 लाख रुपये तक पहुंच गया है। वही शिवनगर में मकान बना रहे रमेश कुमार ने बताया कि जब उसने मकान का निर्माण शुरू किया था, तब रेट कम थे, लेकिन अब प्रतिदिन डंपर के हिसाब से रेट में 30 से 40 फीसदी वृद्धि हो गई है। उन्होंने बताया कि पहले सरिया 33 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा था, अब 46 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। सीमेंट उसने 280 रुपये प्रति बैग में सौदा किया था जो अब बढ़कर 330 रुपये हो गई है।
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कीमतें घटाने के लिए ओवरलोड वाहनों से समझौता नहीं किया जा सकता। ओवरलोड वाहनों पर सख्ती जारी रहेगी। सरकार के आदेश हैं कि ओवरलोड वाहनों के चालान काटने हैं तो चालान काटे जा रहे हैं।’
सतबीर जांगू, सचिव, आरटीए, फतेहाबाद ।
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