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Fatehabad News: 50 बच्चों को हैंडबॉल में दक्ष बना रहीं गांव नहला की नीरज चहल

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महिला कोच नीरज चहल।
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फतेहाबाद। बचपन से पेट में तकलीफ थी, लेकिन इस बेटी ने हिम्मत नहीं हारी। कड़ी मेहनत व लगन के साथ मेहनत करके हैंडबॉल को अपना कॅरियर बनाया और आज वह 50 बच्चों को हैंडबॉल में दक्ष बना रही हैंं। हम बात कर रहे हैं गांव नहला निवासी हैंडबॉल कोच नीरज चहल की, जिन्होंने बचपन से ही कुछ बनने की ठानी थी। पेट में तकलीफ होने के बावजूद उन्होंने ट्रेनिंग ली और अपने परिवार की पहली महिला खिलाड़ी बनीं। नीरज चहल फिलहाल फतेहाबाद में हैंडबॉल कोच के पद पर कार्यरत हैं।
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छोटी जोत के पिता के घर जन्मी नीरज चहल को बचपन से ही पेट में तकलीफ थी। उनके भाई विक्रम को भी चलने में दिक्कत आती थी। नीरज चहल ने बताया कि पेट की तकलीफ के कारण उसे काफी परेशानी होती थी। इस पर उसकी माता ने उसे उसके मामा विनोद के पास ट्रेनिंग के लिए भेज दिया। यहां पर उसने कड़ी मेहनत शुरू कर दी और दौड़ लगानी आरंभ की। पहले वह निजी स्कूल में पढ़ती थी, लेकिन फीस अधिक होने के चलते उसने हिसार के आर्य कन्या स्कूल में मुफ्त एडमिशन लिया। उसने अपने साथ ही 12 और लड़कियों को भी एडमिशन दिलवाया, ताकि वह आगे बढ़ सकें। इसके बाद जब उसने स्कूल में हैंडबॉल खेलते बच्चों को देखा तो उसने इसी को अपना कॅरियर बनाने की ठान ली। नीरज चहल के अनुसार, पेट की तकलीफ तो खेलों में भाग लेते ही काफुर हो गई और इसके बाद हैंडबॉल में उन्होंने अपना पूरा ध्यान दिया। नीरज चहल ने बताया कि उस समय लड़कियों को खेलों में भाग लेना लोगों को पसंद नहीं होता था, लेकिन उनके भाई विक्रम व माता-पिता की प्रेरणा से वह आगे बढ़ीं। संवाद
अंतरराष्ट्रीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जीता गोल्ड
नीरज चहल ने स्कूली, जूनियर, सब जूनियर, कॉलेज लेवल पर राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उन्होंने बांग्लादेश में आयोजित हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और यहां पर भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं सभी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके नाम स्वर्ण पदक है। खेल कोटे में पहले उनको डी ग्रुप में नौकरी मिली थी और इसके बाद क्लर्क का पेपर भी उन्होंने पास कर लिया। रेलवे में नौकरी का भी उनके पास ऑफर आया था और अब खेल कोटे में उनकी प्रतिभा को देखते हुए उनको कोच पद पर नियुक्ति मिली है। नीरज चहल ने जिस खेल को अपनाया और कोचिंग ली, अब वह हैंडबॉल खेल की कोचिंग फतेहाबाद में 50 बच्चों को दे रही हैं।
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कोट
बचपन में पेट में तकलीफ रहती थी और निजी स्कूल की फीस अधिक होने के कारण मुझे आर्य कन्या स्कूल में मुफ्त दाखिला लेना पड़ा। पेट की तकलीफ को दरकिनार करके हैंडबॉल खेलना आरंभ किया। शुरुआती तौर पर परेशानियां आई, लेकिन जब आप हिम्मत करते हैं तो हर मुकाम हासिल कर सकते हैं। मेरे माता-पिता और भाई ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, उनकी बदौलत ही मैं यह मुकाम हासिल कर पाई हूं।
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-नीरज चहल, कोच, हैंडबॉल।
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