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नपा सचिव ने पीएम आवास योजना की राशि जारी की, एसडीएम ने बिठाई जांच

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भूना। प्रधानमंत्री आवास योजना में 199 लोगों को दो करोड़ रुपये नगरपालिका सचिव द्वारा कानूनों को ताक पर रखकर मंजूरी दे दी। इस पूरे मामले से नगरपालिका के प्रशासक एवं एसडीएम को नजरअंदाज किया गया है। गड़बड़झाले में नगरपालिका सचिव ने मुख्य लिपिक ज्योति रानी की आईडी एवं पासवर्ड बदलकर योजना का लाभ दिए जाने का प्रयास किया है। मुख्य लिपिक ने ही एसडीएम को पूरे घटनाक्रम से अवगत करवाया।
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एसडीएम राजेश कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के गड़बड़ झाले की सूचना मिलते ही योजना में लोगों को राशि जारी करने पर रोक लगा दी है। गड़बड़ झाले की तीन सदस्य कमेटी को जांच सौंप दी गई है। कमेटी में नायब तहसीलदार व अकाउंट ऑफिसर फतेहाबाद तथा कनिष्ठ अभियंता को शामिल किया गया है।
राशि लैप्स न हो, इसलिए कायदे कानूनों को ताक पर रख दिया
नगरपालिका के सचिव ने 29 मार्च को मुख्य लिपिक ज्योति रानी की डाटा अप्रूवल आईडी का पासवर्ड बदल दिया और 199 लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चिह्नित करके दो करोड़ रुपये उन्हें आवंटन करने के लिए सूची अपलोड कर दी। सचिव का मानना था कि अगर उपरोक्त राशि जारी नहीं होती तो लैप्स हो जाती। हालांकि, प्रधानमंत्री आवास योजना में भूना में बड़े स्तर पर घोटाले संबंधित आरोप लग रहे थे। योजना में एक प्राइवेट कंपनी ने जियो टैगिंग एवं सर्वे के नाम पर हजारों रुपये का नजराना लेकर ऐसे लोगों का चयन कर दिया था, जो योजना के पात्र भी नहीं थे। तत्कालीन एसडीएम ने प्राइवेट कंपनी के सर्वे की जांच की तो बड़े स्तर पर योजना में गड़बड़ी के सुबूत मिले थे। इसलिए सर्वे कंपनी की चिन्हित सूची को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया था। मगर नगरपालिका सचिव ने मुख्य लिपिक द्वारा इस्तेमाल की जा रही डाटा अप्रूवल आईडी को स्वयं ऑपरेट करके उपरोक्त सूची में से 199 लोगों को तत्काल प्रभाव से फंड जारी कर दिया। तीन दिन बाद मुख्य लिपिक ने अपनी आईडी कंप्यूटर पर खोलने का प्रयास किया तो वह खुली नहीं। दो करोड़ की राशि से संबंधित मैसेज के बाद मुख्य लिपिक के होश उड़ गए। मुख्य लिपिक ने तुरंत बैंक से इस बारे में अकाउंट स्टेटमेंट प्राप्त की तो पूरे मामले का पटाक्षेप हो गया। मुख्य लिपिक ने इस संबंध में नगर पालिका सचिव से मिलकर बातचीत की तो उन्होंने कहा कि डाटा अप्रूवल आईडी उनके अधिकार क्षेत्र का मामला है। मगर दो करोड़ की राशि जारी करने से संबंधित उच्च अधिकारियों का कोई लिखित व मौखिक आदेश नहीं था। इसके चलते मामले को लेकर एसडीएम को अवगत करवाया गया।
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कोट
डाटा अप्रूवल आईडी को मैनेज करने की जवाबदेही सचिव की होती है। कोई गड़बड़ी न हो, इसलिए मैंने पासवर्ड बदल कर प्रधानमंत्री आवास योजना में कुछ पात्र लोगों को चिह्नित किया है।
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-संदीप गर्ग, सचिव, नगरपालिका
प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ झाले से संबंधित मामला संज्ञान में नहीं आया है। मगर फिर भी इस पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।
-प्रदीप कुमार, डीसी, फतेहाबाद
मैं जरूरी काम के लिए बाहर गया हुआ हूं। नगरपालिका भूना में प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ झाले से संबंधित मामले में वीरवार को जानकारी दे पाऊंगा।
-राजेश कुमार, एसडीएम, फतेहाबाद
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