फतेहाबाद। प्रदेश सरकार की ओर से धान की फसल पर एमएसपी लागू है। मगर अनाज मंडी में निर्धारित समर्थन मूल्य पर धान की खरीद नहीं हो रही है। किसानों का कहना है कि ज्यादा नमी और फसल खराब बताकर धान की खरीद कम रेट पर की जा रही है।
सरकार व प्रशासन दावा कर रहा है कि जिले में निर्धारित समर्थन मूल्य 2320 रुपये के हिसाब से ही खरीद एजेंसी धान की खरीद कर रही हैं, लेकिन किसान कुछ और ही हकीकत ब्यां कर रहे हैं। किसान ओमप्रकाश, गुरप्रीत, कर्मजीत, पवन आदि ने बताया कि खरीद एजेंसी किसानों को नुकसान पहुंचा पा रही हैं। पिछले छह दिनों से परमल धान की फसल लेकर मंडी में आए हुए हैं। पहले दिन खरीद एजेंसी ने नमी ज्यादा होने के कारण उनकी फसल नहीं खरीदी। खरीदने के लिए तैयार हुए तो उसकी कीमत दो हजार रुपये तय की। किसान जब इसको लेकर विरोध करते हैं, तो खरीद एजेंसी के कर्मचारी बोली को बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं। निर्धारित समर्थन मूल्य पर खरीद न होने से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।
एमएसपी पर खरीद को लेकर डीसी को सौंपा ज्ञापन
किसान संगठन पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में किसानों ने डीसी मनदीप कौर से मुलाकात कर खरीद में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया। समिति के जिला प्रधान ओमप्रकाश ने बताया कि खरीद एजेंसी एमएसपी पर खरीद नहीं कर रही है। किसान जब इसको लेकर सवाल करते हैं तो वो अलग-अलग बहाने लगाते हैं। किसान सुरेश, मनीराम, सूरजमल, राकेश, पवन आदि ने कहा कि धान खराब होने का हवाला देकर निर्धारित रेट 2320 रुपये में न खरीद कर 1800 से लेकर 2100 रुपये तक खरीद रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। नाराज किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार केवल दिखावे के लिए एमएसपी का ढोल पीट रही है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरित है। उपायुक्त ने किसानों को जांच करवाने का आश्वासन दिया।
किसानों को 310.67 करोड़ का किया भुगतान
जिले में अभी तक 2,37,041 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। इसमें से फूड सप्लाई द्वारा 50929 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 83083 मीट्रिक टन तथा एचडब्ल्यूसी द्वारा 103029 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। वहीं, जिले में अब तक 145522 मीट्रिक टन धान की फसल की उठान हुई है। फूड सप्लाई द्वारा 34 हजार 643 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा 49 हजार 528 मीट्रिक टन तथा एचडब्ल्यूसी द्वारा 61 हजार 351 मीट्रिक टन धान फसल की उठान हुई है, साथ ही किसानों को अभी तक 310.67 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।