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Fatehabad News: मनरेगा का नाम बदला लेकिन मजदूरों को नहीं मिला काम

Thu, 07 May 2026 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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गांव अयाल्की में रंगोई नाले की सफाई का काम करते मजदूर। फाइल फोटो
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फतेहाबाद। ग्रामीण विकास की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर वीबीजीरामजी किया गया है। इसके बाद से पिछले करीब 6 माह से जिले के लाखों मजदूरों को एक दिन का काम भी नहीं सका है। इसको लेकर मजदूर काम जारी होने की मांग कर रहे हैं।
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जिले में वर्तमान में 80,530 परिवारों के जॉब कार्ड पंजीकृत हैं जिनमें 1,00,007 मजदूर शामिल हैं। इन परिवारों के लिए आजीविका का साधन मनरेगा था। नाम बदलने और नई कार्यप्रणाली लागू होने की प्रक्रिया में इन सभी मजदूरों अब रोजगार करने के लिए काम नहीं मिल रहा हैं। मजदूरों का कहना है कि पहले उनके पास साल के 100 दिन का काम सुनिश्चित होता था लेकिन जब से योजना का स्वरूप बदला है मस्ट रोल ही जारी नहीं हो रहे हैं। वीबीजीरामजी योजना के तहत अब अमृत सरोवर जोहड़ की सफाई व खुदाई का काम किया जा सकेगा।

जिले के केवल 31 गांव ऐसे हैं, जिनमें अमृत सरोवर बने हैं। ऐसे में जिले के सभी मजदूरों को काम मिल पाना मुश्किल हो गया है। वहीं मनरेगा मजदूर कृष्ण कुमार, विनोद और रेशमा ने बताया कि योजना का नाम बदलकर बीवीजीरामजी किया गया है। 100 दिन के रोजगार को बढ़ाकर 125 दिन किया गया है लेकिन अभी एक भी दिन का रोजगार नहीं मिला है। सरकार को जल्द काम जारी करवाना करवाना चाहिए।
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सफाई व्यवस्था हो रही प्रभावित

मनरेगा योजना के बंद होने का असर अब जिले की बुनियादी सुविधाओं पर दिखने लगा है। जलघरों के टैंकों की सफाई पहले मनरेगा मजदूरों से करवाई जाती थी। अब जलघर की डिग्गियों की सफाई न होने से उनमें दो से तीन फीट तक गाद जमा हो गई है। इससे लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है। वहीं मानसून से पहले सिंचाई विभाग को बरसाती नालों की सफाई का काम पूरा करना होता है लेकिन सफाई का काम अटका पड़ा है। पहले मजदूर इन नालों से गाद निकालने का काम करते थे जिससे जलभराव की समस्या नहीं होती थी।



ठेकेदारी प्रथा को मिल रहा बढ़ावा



मनरेगा के मेट रमेश कुमार, राय सिंह, होशियार सिंह और मुकेश कुमार ने बताया की योजना के तहत काम जारी न होने के कारण अब जनस्वास्थ्य और सिंचाई विभाग को सफाई का काम निजी ठेकेदारों से करवा रहे हैं। जो काम मनरेगा के तहत सस्ते और पारदर्शी तरीके से होता था, अब उसी काम के लिए ठेकेदारों को बड़ी राशि का भुगतान किया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है, बल्कि गरीब मजदूरों का रोजगार छीनकर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।



:: सिंचाई विभाग नहर नालों की सफाई का काम पहले मनरेगा मजदूरों से करवाता था। अब ठेकेदारों से काम करवा रहा है। मानसून से पहले बरसाती नालों की सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा।
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- नरेश कुमार भोला, कार्यकारी अभिंयता, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद।
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