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अफसरों ने कतरे जिप सदस्यों के पर, दस लाख ग्रांट की सहमति के बाद भी नहीं मिला पैसा

Mon, 18 Jul 2016 01:02 AM IST
fatehabad
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करोड़ो रुपए का आया चंदा - फोटो : demo
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गांवों में विकास कार्य करवाने के लिए जिला परिषद सदस्यों को अब पूरी तरह अधिकारियों पर आश्रित रहना पड़ेगा। जून में हुई जिला परिषद की बैठक में दस लाख की ग्रांट पर सहमति के बावजूद अभी तक जिला परिषद पार्षदों को अपने इलाकों में विकास के लिए एक रुपया भी नहीं मिला है। जबकि जिला परिषद का गठन हुए लगभग चार माह से अधिक समय हो चुका है। इतना ही नहीं, डी-प्लानिंग कमेटी से भी जिप पार्षदों को जगह नहीं दी गई है। पहले डी-प्लान में आई ग्रांट का 10 प्रतिशत जिला परिषद पार्षदों और 15 प्रतिशत पंचायत समिति सदस्यों को दिया जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था बंद कर दी गई है। ऐसे में जिला परिषद सदस्यों को गांवों में विकास कार्य करवाने के लिए अब लंबी भागदौड़ करनी पड़ेगी।
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जिला परिषद की पहली बैठक में सहमति के बावजूद नहीं मिली ग्रांट
नौ जून को जिला परिषद की पहली बैठक में जिप पार्षद बीबो इंदौरा ने सभी पार्षदों को विकास कार्य करवाने के लिए 10-10 लाख ग्रांट देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे बैठक में मौजूद 15 पार्षदों ने सहमति दी थी। इस बैठक में डीसी, एडीसी, डीडीपीओ सहित जिला परिषद के कई अफसर भी मौजूद थे।

दरअसल पीछे पीआरआई स्कीम की पहली किस्त के रूप में तीन करोड़ रुपये की ग्रांट आई थी। इसके लिए यह तय हुआ कि तीन करोड़ की ग्रांट में से सभी 18 जिप सदस्यों को 10-10 लाख की ग्रांट दे दी जाए और बाकी बचे एक करोड़ 20 लाख की ग्रांट खर्च करने के लिए जिप चेयरमैन को अधिकृत कर दिया गया।
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जिप उपाध्यक्ष भी ग्रांट के इंतजार में
जिप चेयरपर्सन गीता रानी के एक कार्यक्रम में व्यस्त होने पर जब जिप उपाध्यक्ष से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह खुद अपने इलाके में विकास करवाने के लिए ग्रांट की बाट जोह रही हैं। उन्होंने बताया कि जून में हुई बैठक में इस बात को लेकर सहमति बनी थी कि सभी पार्षदों को 10-10 लाख ग्रांट दी जाएगी, लेकिन बाद में क्या हुआ ये पता नहीं।

ये हैं विपक्षी पार्षदों के आरोप
जून में हुई जिला परिषद की पहली बैठक में यह बात तय हुई थी कि सभी पार्षदों को समान ग्रांट दी जाएगी। इस मौके पर जिले के अफसर भी मौजूद थे। इस बात को ही एजेंडे में शामिल किया गया था, लेकिन बैठक के बाद जिला परिषद के डिप्टी सीओ और एओ ने एजेंडे को दोबारा खोल दिया जो नियमों के खिलाफ है। अभी तक ग्रांट के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिला है, जिसे अपने इलाके में लगा सकें।
-बीबो इंदौरा, जिप पार्षद, वार्ड नंबर-9

सरकार का रवैया समझ से परे है। एक तरफ तो हर गांव में विकास की बात करती है, लेकिन चुने हुए जिप पार्षदों को अब तक ग्रांट ही उपलब्ध नहीं करवाई है। साथ ही डी-प्लान कमेटी से जिप पार्षदों को बाहर कर दिया गया है। यह सरासर गलत है। विकास के लिए जिप पार्षदों को भी ग्रांट मिलनी चाहिए।
-कामरेड रामचंद्र सहनाल, जिप पार्षद, वार्ड नंबर-11

ये कहते हैं अधिकारी
जिप पार्षद के पास खुद की कोई स्वतंत्र ग्रांट नहीं होती है। यह जिला परिषद हाउस की ग्रांट होती है, जिसे बैठक के दौरान पार्षदों में बांटा जा सकता है। नियमानुसार ही ग्रांट दी जाएगी। विकास के रास्ते में पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी।
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राजेश खोथ, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, फतेहाबाद ।

जिप पार्षदों के आरोपों का सामना कर रहे जिला परिषद के डिप्टी सीओ का फोन स्विच ऑफ मिला।
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