डाक्टरों के बिना जिले की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। इमरजेंसी तक के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। डाक्टरों की डबल शिफ्ट लगने के बावजूद कमी पूरी नहीं हो रही है। यहां तक कि इमरजेंसी को ऑक्सीजन चढ़ाने के लिए विशेषज्ञों को आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी देना जरूरी कर दिया है। कमी फिर भी पूरी नहीं हुई तो भट्टू सीएचसी के तीन डाक्टरों की ड्यूटी इमरजेंसी में लगाई गई है। जिले भर में डॉक्टरों के 126 में से 77 पद खाली हैं।
सिविल अस्पताल फतेहाबाद के इमरजेंसी वार्ड में मेडिकल आफिसर के आठ पद स्वीकृत हैं। इनमें मात्र दो ही एमओ तैनात हैं। यहां भट्टू सीएचसी से तीन डाक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बावजूद डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं होने पर ओपीडी डाक्टरों को इमरजेंसी में सेवाएं देना जरूरी कर दिया है।
महीने में तीन ड्यूटी देनी होगी जरूरी
विभाग के अनुसार ओपीडी विशेषज्ञों को महीने में तीन ड्यूटियां इमरजेंसी में देनी होगी। यानी इमरजेंसी वार्ड में डाक्टर को सीरियस मरीजों के साथ-साथ ओपीडी भी देखनी होगी। विभाग के अनुसार, इमरजेंसी में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. रमा बंसल, डॉ. लता, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन, छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष, डॉ. राजेश और डॉ. गुंजन की ड्यूटी लगाई गई है।
डाक्टरों के साथ ही मरीजों को भी परेशानी
इमरजेंसी में ही विशेषज्ञों की ड्यूटी लगने से उन्हें सीरियस मरीजों के अलावा ओपीडी भी देखनी होगी। इमरजेंसी में अगर सीरियस मरीजों की संख्या ज्यादा हो जाती है तो डाक्टर के लिए ओपीडी देख पाना मुश्किल होगा। सिविल अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ व छाती रोग विशेषज्ञ के पास प्रतिदिन 100 से ज्यादा ओपीडी होती है। ऐसे में मरीजों का प्रभावित होना लाजमी है।
126 पदों में से 77 से ज्यादा पद खाली
जिले में डाक्टरों के 126 पद स्वीकृत हैं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, यहां डाक्टरों के 77 से ज्यादा पद खाली हैं। फतेहाबाद के सिविल अस्पताल में ही 42 में से 22 पद खाली हैं। इसके अलावा 12 स्वास्थ्य केंद्रों पर तो एक भी डाक्टर उपलब्ध नहीं है।
इमरजेंसी में डाक्टरों का टोटा है। भट्टू से तीन डाक्टरों की ड्यूटी यहां लगाई गई है। इसके अलावा ओपीडी डॉक्टरों की भी महीने में तीन ड्यूटियां इमरजेंसी में लगाई गई है। क्योंकि आपातकालीन वार्ड को चलाना जरूरी है।
डॉ. गिरीश, डिप्टी सिविल सर्जन फतेहाबाद