सिरसा रोड स्थित हरियाणा एग्रो के गोदाम में खुले आसमान के नीचे करीब 30 हजार गेहूं के कट्टे पड़े रहे। हालांकि गोदाम प्रबंधन के पास तिरपाल भी था, लेकिन गेहूं को ढकने की जहमत कोई नहीं उठा रहा। अगर बारिश हुई तो करोड़ों रुपये का यह गेहूं खराब हो जाएगा।
हरियाणा एग्रो के गोदाम में करीब 15 मीट्रिक टन गेहूं रखा है। गोदाम में तैनात कारिंदे गेहूं के रखरखाव में लापरवाही बरत रहे हैं। बारिश आने पर भी कट्टों को नहीं ढका जाता। बारिश में भीग जाने के बाद गेहूं काला पड़ना शुरू हो जाता है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो लापरवाही के कारण करोड़ों का गेहूं खराब हो सकता है। तीन दिन पहले फतेहाबाद में आई बारिश से करीब 30 हजार गेहूं के कट्टे पानी में भीग गए थे। बारिश करीब आधा घंटा चली थी, लेकिन गोदाम के कर्मचारियों ने उठकर गेहूं की बोरियों को ढकने का प्रयास तक नहीं किया। शनिवार को जब गोदाम का दौरा किया तो पाया कि गेहूं के कट्टे अभी भी खुले आसमान के नीचे रखे हैं। तिरपाल नीचे पड़ा था, लेकिन गेहूं को ढकने पर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में बरसात हुई तो गेहूं का खराब होना तय है।
खाना खाते ही ढकवा देता हूं तिरपाल
जब गेहूं की बोरियों के न ढके होने के बारे में गोदाम का काम देख रहे मंडी इंस्पेक्टर रामअवतार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे खाना खाकर अभी कट्टे ढकवा देते हैं। उधर, हरियाणा एग्रो के डीएम रविंद्र वर्मा ने बताया कि दवाई लगाने के लिए तिरपाल हटाया गया था। बारिश ज्यादा हो तो गेहूं खराब होने का डर रहता है। अभी ज्यादा बारिश नहीं हुई है, फिर भी मैं आदेश देकर गेहूं के कट्टे ढकवा देता हूं।