फतेहाबाद। सरसों की फसल में मरगोजा खरपतवार से किसान चिंतित हैं। मरगोजा एक परजीवी खरपतवार है। इसे रूखड़ी, गुल्ली, खुंबी आदि नामों से भी जाना जाता है। यह रेतीली जमीन में ज्यादा होता है। इस कारण सरसों की पैदावार में 30 से 60 प्रतिशत तक की कमी होने की आंशका रहती है।
मरगोजे का पौधा सरसों की जड़ में उगता है। इससे फलियों में दाना नहीं पक पाता है। इस कारण उत्पादन में कमी होने की आशंका बनी रहती है। जिले में सरसों की फसल का सबसे अधिक रकबा भट्टू खंड के साथ लगते गांव ठुइंया, ढाबी, रामसरा, दैयड़, ढिंगसरा, बनमंदोरी, पीलीमंदोरी, शेखूपुर और मेहूवाला में होता है। इस क्षेत्र में ज्यादातर जमीन रेतीली है। किसान जयप्रकाश, विजय सिंह, विकास, जसवंत सिंह, दरिया सिंह और प्रकाश चंद आदि ने बताया की पिछले 20 दिनों से सरसों की फसल में मरगोजा काफी फैल चुका है।
आधी रह गई उपज, सरसों से दूर हुए किसान
जिले के गांव मेहूवाला के किसान विपिन ने बताया कि तीन साल पहले तक खेतों में मरगोजा नहीं था और सरसों की पैदावार औसतन 9 क्विंटल प्रति एकड़ होती थी। लेकिन अब मरगोजा उगने के बाद यह घटकर सिर्फ 6 क्विंटल तक रह गई है। ऐसे में इस साल मात्र तीन एकड़ में ही सरसों बोई है, जबकि पहले वे 10 एकड़ से अधिक भूमि पर सरसों की खेती करते थे। कई किसानों ने सरसों की जगह गेहूं और चना जैसी फसलों का रुख कर लिया है।
जमीन में 20 साल तक जिंदा रहता है मरगोजा का बीज
कृषि एवं कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने बताया कि मरगोजा एक परजीवी पौधा है। यह सरसों के पौधे की जड़ में ही होता है। मरगोजा जमीन के नीचे ही सरसों की जड़ों पर हमला कर देता है। जब तक इसके बैंगनी रंग के फूल जमीन के ऊपर दिखाई देते हैं, तब तक फसल का ज्यादातर नुकसान हो चुका होता है। इसका एक ही पौधा हजारों बीज पैदा करता है जो मिट्टी में 20 साल तक जिंदा रह सकते हैं, जिससे यह बहुत तेजी से फैलता है। इससे सरसों की पैदावार में गिरावट होती है।
:: इससे बचाव के लिए सरसों की बिजाई के 25 से 30 दिन के बाद 25 एमएल राउंड अप या ग्लाइसल प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। इस खरपतवारनाशक का दूसरा छिड़काव 50 से 55 दिन बाद 50 एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से करें। छिड़काव एक साथ करें अथवा कट या टक वाली नोजल का इस्तेमाल करें। वहीं छिड़काव से 3-4 दिन पहले या बाद में सिंचाई अवश्य करें। ताकि दवा सरसों के पौधे की जड़ तक पहुंच सके।
- डॉ. ओमप्रकाश कंबोज, जिला कृषि विस्तार विशेषज्ञ, एचएयू हिसार।