शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर बहुप्रतीक्षित मांग को झटका लगा है। मुख्य डंपिंग साइट पर सात सालों से जमा कचरा को खत्म करने के लिए अब लंबा इंतजार करना होगा। नगर निकाय ने दो माह बाद आखिरकार कचरा को नष्ट करने के लिए लगाए गए 4.35 करोड़ रुपये के टेंडर को रद्द कर दिया है। ये टेंडर पिछले दो माह से बार-बार आगे बढ़ाया जा रहा था। 23 जुलाई को नगर निकाय ने इस टेंडर को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि शर्तो में फेरबदल किया जाएगा। नई शर्तें तय करने के बाद टेंडर होगा। जबकि नगर निकाय मुख्यालय ने खुद शर्तें तय करके टेंडर जारी किया था।
पहला टेंडर 16 मई, दूसरी बार 28 मई, तीसरी बार 12 जून तथा फिर 3 जुलाई को इस टेंडर को लगाया गया था। अब ये टेंडर 23 जुलाई को खुलना था लेकिन नगर परिषद अधिकारियों को इसे रद्द के आदेश दिए गए।
चहेती कंपनियों को राहत देने की तैयारी
टेंडर रद्द करने के पीछे कारण यह भी माना जा रहा है कि नगर निकाय ने जो शर्तें तय की है उसे कंपनियां पूरी नहीं कर पा रही है। नई शर्ते में कुछ राहत देकर कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सकता है। ताकि कंपनियों इस साढ़े चार करोड़ रुपये के टेंडर को हासिल कर सकें।
45 हजार टन जमा हो चुका है कचरा, समाधान नहीं
नगर परिषद शहर से व घरों से कचरा इकट्ठा करने के बाद इसे बीघड़ रोड स्थित डंपिंग साइट पर पहुंचाता है। नप अधिकारियों के मुताबिक रोजाना शहर से 25 टन कचरा निकलता है। पिछले सात सालों से कचरा डंपिंग साइट पर इकट्ठा हो रहा है। करीब 45 हजार टन कचरा यहां पर इकट्ठा हो चुका है। भूना में शुरू होने वाले कलस्टर स्तर के कूड़ा निस्तारण प्लांट में देरी होने के कारण नप स्तर पर टेंडर लगाया जा रहा था। शर्तो में यह था कि टेंडर लेने वाली एजेंसी यहां पर जमा कचरे को अलग-अलग करेगी। यहां से कागज, पॉलिथीन, प्लास्टिक व कांच आदि को अलग किया जाएगा। एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि वह इसे किस तरह से खत्म करेगी। एजेंसी दोबारा इस्तेमाल में लिए जाने वाले कचरे को बेच भी सकती है और खाद भी बना सकती है। इसके अलावा दोबारा प्रयोग में न आने वाले कचरे को ट्रांसपोर्ट के जरिए शहर से बाहर ले जाकर खत्म करने की जिम्मेदारी एजेंसी की होगी।
शर्तों में उलझी कंपनियां
नगर परिषद ने कचरा को खत्म करने के लिए 4 करोड़ 35 लाख रुपये का टेंडर लगाया था शर्त यह थी कि फर्म के पास तीन साल का पिछले पांच साल के अंदर योग्यता प्रमाण पत्र होना चाहिए। कम से कम एक प्रोजेक्ट पर इसी फिल्ड में काम किया होना चाहिए। पहले 20 से 25 हजार टन कचरा खत्म करने का काम किया होना चाहिए। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में काम किया होना चाहिए। हर साल का 30 फीसद टर्न ओवर होना चाहिए। वर्क ऑर्डर के समय भी शर्ते तय होनी थी।
20 फीट तक जमा है कचरा :
नप अधिकारियों की माने तो करीब 20 फुट तक कचरा जमा है। नप ने डंपिंग साइट पर चहार दिवारी करवाई थी लेकिन कचरे का निस्तारण न होने के कारण ये यहीं जमा होता रहा। हालात यह हो गए कि करीब 20 फुट तक ऊंचाई तक कचरा जमा हो चुका है।
नगर निकाय मुख्यालय ने डंपिंग साइट से कचरा खत्म करने के टेंडर को रद्द कर दिया है। अब नए सिरे से शर्तें तय करके टेंडर लगाया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर इसको लेकर काम शुरू हो गया है।
-कुमार सौरभ, जिला संयोजक, स्वच्छ भारत मिशन ।