परमाणु बिजली संयंत्र के आवासीय क्षेत्र की अधिगृहीत जमीन पर वन्य जीवों का ठौर बन गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद एनपीसीएल ने अपनी सभी गतिविधियां इस क्षेत्र में बंद की हुई है। इसी कारण से वन्य जीव अब इसी क्षेत्र में दोबारा से रहने लगे हैं। इस समय इस क्षेत्र में हिरण, बारहसिंगा और नील गाय बड़ी संख्या में देखी जा सकती है।
एनपीसीएल ने बड़ोपल में 185 एकड़ भूमि को अधिगृहीत किया है।
इस जमीन पर एनपीसीएल की ओर से कालोनी आबाद की जानी हैं। जो जगह एनपीसीएल को मिली है, इस क्षेत्र में पहले से वन्य जीवों का ठौर रहा है। इसलिए अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा ने इस जमीन को वन्य जीवों का क्षेत्र बताते हुए यहां की एनपीसीएल की गतिविधियां बंद करवाए जाने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दावा डाला।
ट्रिब्यूनल ने तत्काल काम बंद करने के निर्देश दिए। इसके बाद से यहां काम बंद हैं और अब वन्य जीव ही इस क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं। ज्ञात रहे कि पिछले दिनों उपायुक्त ने कॉलोनी को यहां न बसाने की बात कही। बल्कि उन्होंने कहा कि कॉलोनी के लिए कहीं और जगह देख रहे हैं।
देहरादून की टीम ने किया था दौरा
वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर देहरादून के भारतीय वन्य जीव संस्थान की विशेषज्ञ टीम ने दौरा किया और इस जगह को वन्य जीवों के लिए उपयुक्त माना। टीम की सिफारिश भी इस क्षेत्र से एनपीसीएल की गतिविधियां दूसरी जगह शिफ्ट करने की रही हैं।
सैकड़ों हिरण रहते हैं इस क्षेत्र में : कड़वासरा
संस्था की ओर से ग्रीन ट्रिब्यूनल में केस दायर करने वाले विनोद कड़वासरा का कहना है कि परमाणु संयंत्र अधिगृहीत जगह वन्य जीवों की रही है। इस समय सैकड़ों की संख्या में हिरण व नील गाय यहां रहते हैं। वन्य जीवों का क्षेत्र नहीं बदला जा सकता। इस समय यहां हिंसक कुत्ते हिरणों पर हमला कर देते हैं। उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं। केंद्र सरकार ने एक विशेष प्लान के तहत हरियाणा में कुत्तों का बंधीकरण करने का फैसला किया है। इसके बाद यह जगह हिरणों के लिए अपने आप ही अभ्यारण बन जाएगी।
छोटे वन्य जीवों को बचाए सरकार : इंद्राज ज्याणी
जीव प्रेमी इंद्राज ज्याणी ने कहा कि बड़ोपल क्षेत्र में विलुप्त प्रजाति में शामिल हिरण के अलावा दूसरे वन्य जीव भी देखे गए हैं। उन्होंने कहा कि बड़ोपल के टिब्बों में वन्य जीवों का प्रवास है। सरकार को चाहिए कि वन्य जीवों को बचाए जाने के लिए कोई अभियान चलाए ताकि इनके जीवन पर संकट को क किया जा सके।
कोट
गोरखपुर परमाणु संयंत्र के कर्मचारियों के लिए बड़ोपल-कुम्हारिया के बीच विकसित की जा रही आवासीय कालोनी स्थानांतरित करने के लिए सरकार को पत्र लिख दिया गया है ताकि वन्य जीवों को बचाया जा सके।
- डीके बेहरा, उपायुक्त, फतेहाबाद