भूना। मुख्यमंत्री जागृत ग्राम पुरस्कार योजना में जिले की पंचायतों ने प्रदेशभर में अपनी उत्कृष्ट पहचान बनाई है। विकास एवं पंचायत विभाग की ओर से घोषित परिणामों में भूना ब्लॉक की ग्राम पंचायत जांडली कलां तथा नागपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जल्लोपुर ने अपनी-अपनी श्रेणियों में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया है। दोनों पंचायतों को पुरस्कार स्वरूप 51-51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
प्रदेश सरकार द्वारा गांवों में सामाजिक, आर्थिक एवं आधारभूत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित इस योजना के तहत पंचायतों का चयन व्यापक मूल्यांकन और धरातल पर किए गए निरीक्षण के आधार पर किया गया। 5000 से अधिक आबादी वाली पंचायतों की श्रेणी में जांडली कलां ने प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।
इस श्रेणी में चरखी दादरी जिले की झींझर पंचायत दूसरे तथा अंबाला जिले की केसरी पंचायत तीसरे स्थान पर रही। वहीं 5000 से कम आबादी वाली पंचायतों में फतेहाबाद के नागपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जल्लोपुर ने प्रथम स्थान हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। भट्टू कला ब्लॉक की गदली पंचायत को दूसरा तथा करनाल जिले की मर्दानहेडी पंचायत को तीसरा स्थान मिला है।
मुख्यमंत्री जागृत ग्राम पुरस्कार योजना का उद्देश्य गांवों में स्वच्छता, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और आधारभूत सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित करना है। उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतों को प्रथम पुरस्कार के रूप में 51 लाख, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 31 लाख तथा तृतीय पुरस्कार के रूप में 21 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
पुरस्कार वितरण समारोह 9 जून को पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में चयनित पंचायतों को सम्मानित करेंगे जबकि विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। समारोह में जांडली कलां की सरपंच शीला भैरो, जल्लोपुर के सरपंच मांगेराम सहित अन्य चयनित पंचायतों के सरपंच, बीडीपीओ और ग्राम सचिव भी उपस्थित रहेंगे।
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ऐसे होता है पंचायतों का चयन
ग्रामीण विकास और पंचायतों को बेहतर कार्य के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री जागृत ग्राम पुरस्कार योजना (मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना) के तहत ग्राम पंचायतों का चयन विभिन्न विकास मानकों के आधार पर किया जाता है। योजना के अंतर्गत पंचायतों का 100 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें गरीबी मुक्त गांव, स्वस्थ गांव, बाल मैत्री गांव, पर्याप्त जल उपलब्धता, स्वच्छ एवं हरित वातावरण, मजबूत बुनियादी ढांचा, सामाजिक सुरक्षा, सुशासन तथा महिला हितैषी पहल जैसे प्रमुख बिंदु शामिल हैं। योजना के अनुसार किसी भी ग्राम पंचायत को पुरस्कार के लिए न्यूनतम 45 अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
दो चरणों में होती है चयन प्रक्रिया
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान विकास, स्वच्छता, नवाचार, जनभागीदारी और सुशासन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पंचायतें आवेदन के लिए पात्र मानी जाती हैं। चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। पहले जिलास्तरीय समिति सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली पंचायतों का चयन कर रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजती है। इसके बाद राज्यस्तरीय समिति अंतिम चयन कर विजेता पंचायतों को सम्मानित करती है। योजना का उद्देश्य पंचायतों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास, बेहतर प्रशासन और जनकल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा देना है।
गांव में नशे पर पूरी तरह से लगाम लगाई गई है। गांव में पर्यावरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है और खेलों के मामले में भी गांव के खिलाड़ी आगे रहता है। गांव में सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए है और लोगों के घूमने के लिए पार्क बनाए गए हैं। सुंदरीकरण के लिए गांव के चारों तरफ तिरंगा लाइटें लगाई गई हैं। गांव में पशुओं के लिए अलग से जोहड़ बनाया गया है। गांव में पानी निकासी का उचित प्रबंध है।
- शीला भैरो, सरपंच, जांडलीकलां
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गांव स्वच्छता के मामले में पहले स्थान पर है। गांव खुले में शौच मुक्त घोषित है और पहले राष्ट्रपति अवॉर्ड पंचायत को मिल चुका है। गांव में समय पर सफाई होती है और कचरा उठान के लिए गाड़ी लगाई गई है। गांव लिंगानुपात में भी श्रेष्ठ है।
- मांगेराम, सरपंच, जल्लोपुर