रोड जाम की चेतावनी देने के बाद धरना स्थल के नजदीक पुलिस फोर्स भी तैनात रही। लेकिन
धरना स्थल पर जाटों की संख्या उम्मीद से कम रही।
साढ़े बारह बजे समिति
सदस्य इकट्ठे होकर लघुसचिवालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। वहां से
पैदल नारेबाजी करते हुए डीसी कार्यालय की ओर बढ़े लेकिन मौके पर तैनात
एसएचओ की टीम ने धारा 144 का हवाला देते हुए उन्हें वहीं रोक लिया। दस
सदस्यों को डीसी कार्यालय में ले जाकर पुलिस अधिकारियों ने ज्ञापन दिलवाया।
हमने तो डीसी को ही ज्ञापन देना है चाहे दो घंटे खड़ा रहना पड़े
जाट
आरक्षण की अधिसूचना रद करने पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति की ओर से
प्रदर्शन को लेकर सिरसा रोड पर निर्माणाधीन अनाजमंडी में काफी बड़ा टेंट
लगाया गया।
दोपहर 12 बजे तक 50 से 60 जाट की संख्या में ही लोग धरना स्थल
पर पहुंचे। जिसके बाद समिति के सदस्यों ने लघुसचिवालय की ओर रुख किया।
जहां
पहले से ही भारी संख्या में तैनात पुलिस फोर्स थाना प्रभारी दलीप सिंह,
इंस्पेक्टर गौरव शर्मा, कुलदीप सिंह, बिजेन्द्र ने मोर्चा संभाले हुए थे।
समिति सदस्य जैसे ही डीसी कार्यालय की ओर बढ़े, उन्हें पार्किंग स्थल पर ही
रोक लिया गया। इसके बाद एसडीएम संतलाल पचार मौके पर ज्ञापन लेने के लिए
पहुंचे लेकिन समिति के सदस्यों ने देने से मना कर दिया।
समिति के सदस्यों
ने कहा कि उन्हें तो उपायुक्त को ही ज्ञापन देना है चाहे उन्हें दो घंटे
खड़े रहना पड़े। आखिर में उन्हें ऊपर बुलाया गया। लेकिन अन्य जाट सदस्य अड़
गए कि वह सभी जाएंगे।
पुलिस अधिकारियों ने धारा 144 का हवाला देते हुए कहा
कि 10 सदस्य ही ज्ञापन देने के लिए अंदर जा सकते हैं। काफी देर तक बहस
होने के बाद आखिर में पुलिस अधिकारियों के साथ जाट सदस्य उपायुक्त कार्यालय
पहुंचे और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
धरने में
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूबेसिंह ढ़ाका, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सूरत
सिंह गाजूवाला, बलवान सिंह युवा जिला प्रधान, ओमप्रकाश भट्टू, मांगेराम
देहडू, भूपसिंह कड़वासरा, ब्रजलाल देहडू सहित गाजूवाला, ढ़ाणी गोपाल, ढ़ाणी
सांचला, भूथन, मेहूवाला, किरढ़ान, सरवरपुर, दोलतपुर, बैजलपुर से सदस्य
पहुंचे।
सूबेसिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 26 मार्च 2015 को जाट समाज के
प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया था कि शीघ्र जाटों को आरक्षण देने के निर्णय
को बहाल करने के प्रयास किए जाएंगे।
मुख्य मांगें
-जिन जाट युवाओं का चयन 17 मार्च 2015 से पहले केंद्रीय नौकरियों या बैंकों में हुआ है उन्हें अविलंब ज्वाइन करवाया जाए।
-केंद्र सरकार द्वारा कानून बनाकर जाट आरक्षण प्रदान किया जाए।
-जिन प्रदेशों में जाटों को प्रदेश स्तर पर आरक्षण नहीं मिला है, वहां आरक्षण दिलवाया जाए।
-हरियाणा प्रदेश का एसबीसी आरक्षण का मुद्दा पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। हरियाणा सरकार केस की पैरवी करे।