दरअसल नगर परिषद सीमा में आने वाले 546 आवेदकों ने शौचालय ग्रांट योजना के तहत अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए नगर परिषद में आवेदन किया।
नगर परिषद अधिकारियों ने सक्रियता दिखाते हुए टीमें बनाकर इन सभी आवेदकों के डोर-टू-डोर वैरिफिकेशन कर डाली। वैरिफिकेशन में हैरतअंगेज खुलासा हुआ।
जिन 546 आवेदकों ने शौचालय बनाने के लिए ग्रांट की डिमांड की है, उनमें 491 आवेदकों के घर में तो पहले से ही शौचालय बना हुआ है।
नगर परिषद अब इन फर्जी आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई का मन बना रही है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा गया है।
वैरिफिकेशन ना होती तो नप को लगती लगभग 69 लाख की चपत
योजना के तहत गरीब परिवार को शौचालय बनाने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी जाती है। इसके लिए आवेदक को नगर परिषद में आवेदन देना होता है।
साथ में शपथ पत्र देकर ये बताना होता है कि उसके घर में शौचालय नहीं है। ऐसे में नगर परिषद की ओर से सारी कागजी कार्रवाई के बाद शौचालय की लागत 14 हजार रुपये आवेदक के बैंक खाते में सीधा डाल दिया जाता है।
ऐसे में इस योजना के तहत नगर परिषद के पास 556 आवेदन आए थे जिनमें से 491 फर्जी निकले हैं। अगर इन फर्जी आवेदकों को भी शौचालय बनाने के लिए ग्रांट दे दी जाती तो नगर परिषद को कुल 68 लाख 74 हजार की चपत लगनी तय थी।
वैरिफिकेशन के लिए बनी तीन टीमें, फर्जी आवेदकों के शौचालयों की फोटोग्राफी भी करवाई
नगर परिषद एमई एचके शर्मा ने शौचालय ग्रांट आवेदकों की वैरिफिकेशन करवाने का निर्णय लिया और इसके लिए बाकायदा तीन टीमें बनाकर शौचालय की ग्रांट के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों की फिजिकल वैरिफिकेशन करवाने का जिम्मा सौंपा।
नगर परिषद की ओर से बनाई गई टीमों का नेतृत्व जेई सुमित चोपड़ा, जेई हितेन्द्र राठी और भवन निरीक्षक विकास बजाज को सौंपा गया था।
इन तीनों टीमों ने लगातार कई दिन तक डोर-टू-डोर तक वैरिफिकेशन करने के बाद अपनी रिपोर्ट एमई को सौंपी, जिसमें 491 आवेदकों के फर्जी होने के बारे में बताया गया।
55 सही आवेदकों को भी दिखाना होगा मकान का मालिकाना हक
दूध के जले का छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीने की कहावत को चरितार्थ करते हुए नगर परिषद अफसरों ने अब सही पाए गए 55 आवेदकों को भी मकान का मालिकाना हक साबित करने को कहा है।
इसके लिए उनसे मकान की रजिस्ट्री, बिजली बिल आदि मंगवाए जा रहे हैं। इसके बाद आवेदकों द्वारा जमा करवाए सबूतों की भी वैरिफिकेशन होगी। फिर नगर परिषद शौचालयों के लिए ग्रांट जारी करेगी।
शौचालय के लिए ग्रांट मांगने वाले 546 आवेदकों में 491 आवेदक फर्जी पाए गए हैं। प्रत्येक शौचालय के लिए 14 हजार तक की ग्रांट दी जानी थी। लेकिन समय रहते फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया है। अब उच्चाधिकारियों से सलाह लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एचके शर्मा, एमई, नगर परिषद, फतेहाबाद