फतेहाबाद। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में महिला आरक्षण बिल को मंजूरी मिलने के बाद लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश किया गया है। ऐसे में महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 33 फीसदी भागीदारी होने की प्रबल संभावना बन गई है। हरियाणा बनने के बाद 57 साल के इतिहास में फतेहाबाद जिले में एकमात्र स्वतंत्र बाला चौधरी ने ही महिलाओं की चौधर को सिरे चढ़ाया था।दरअसल, साल 2000 में इनेलो की टिकट पर विधायक बने लीलाकृष्ण चौधरी का साल 2003 में निधन हो गया। उसके बाद हुए उपचुनाव में इनेलो ने उनकी पुत्रवधू स्वतंत्र बाला चौधरी को टिकट दी थी। स्वतंत्र बाला चौधरी ने अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार दुड़ाराम को करीब 7700 वोटों से पराजित किया था। स्वतंत्र बाला चौधरी राजनीति में आने से पहले राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने प्रधानाचार्य पद से इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ा था। हालांकि, एक बार विधायक बनने के बाद दो बार और स्वतंत्र बाला ने चुनाव लड़े, लेकिन वह जीत हासिल नहीं कर पाईं। पहले वह इनेलो पार्टी में रहीं, बाद में भाजपा का दामन थाम लिया। संवाद
यह है नारी शक्ति वंदन विधेयक
नारी शक्ति वंदन विधेयक में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी या एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है। इस हिसाब से हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 30 पर महिला विधायकों को चुना जाएगा। वहीं, 10 लोकसभा सीटों में से 3 महिला सांसद चुनी जा सकेगी। फिलहाल पूरे प्रदेश में एकमात्र महिला सांसद सिरसा लोकसभा से सुनीता दुग्गल ही हैं।
ये महिलाएं भी लड़ चुकीं हैं विधानसभा चुनाव
स्वतंत्र बाला चौधरी के अलावा फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र से इनेलो की टिकट पर सुमनलता सिवाच, भाजपा की टिकट पर दुर्गेश अरोड़ा के अलावा रतिया विधानसभा क्षेत्र से मंजू बाजीगर, तत्कालीन भट्टू विधानसभा से कमलेश बैनीवाल भी चुनाव लड़ चुकी हैं।
फतेहाबाद विधानसभा से अब तक बने विधायक
1967 : जी राय
1968 : पोकर राम
1972 : पोकर राम
1977 : हरफूल सिंह
1982 : गोबिंद राय
1987 : बलबीर सिंह चौधरी
1991 : हरमिंदर सिंह
2000 : लीला कृष्ण
2003 : स्वतंत्र बाला चौधरी
2005 : दुड़ाराम
2009 : प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा
2014 : बलवान सिंह दौलतपुरिया
2019 : दुड़ाराम
टोहाना के अब तक बने विधायक
1968 : हरपाल सिंह
1972 : हरपाल सिंह
1977 : कर्म सिंह
1982 : हरपाल सिंह
1987 : हरपाल सिंह
1991 : हरपाल सिंह
1996 : विनोद कुमार
1999 : निशान सिंह
2005 : परमवीर सिंह
2009 : परमवीर सिंह
2014 : सुभाष बराला
2019 : देवेंद्र सिंह बबली
रतिया के अब तक बने विधायक
1977 : पीरचंद
1982 : नेकीराम
1987 : आत्मा सिंह गिल
1991 : पीरचंद
1996 : रामस्वरूप रामा
2000 : जरनैल सिंह
2005 : ज्ञानचंद ओड
2009 : ज्ञानचंद ओड
2011 : जरनैल सिंह
2014 : प्रो. रविंद्र बलियाला
2019 : लक्ष्मण नापा
कोट
यह आरक्षण मिलने के बाद महिलाओं को राजनीति में और अवसर मिलेंगे। वह मजबूती से महिला वर्ग के मुद्दों को विधानसभा और संसद में उठाकर सरकार का ध्यान दिला सकेंगी।
-कमलेश बैनीवाल, पूर्व प्रत्याशी, हविपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं दावेदार
कोट
महिलाओं को आरक्षण मिलना अच्छी बात है। इससे महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी। वह भी विधायक और सांसद बनकर जनता के लिए कानून बनाने में सहायक बनेंगी।
-सुमनलता सिवाच, इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं दावेदार
कोट
महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण मिलना महिलाओं के लिए बेहद सम्मान और गर्व की बात होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट ने महिलाओं की शक्ति को सम्मान दिया है। निश्चित रूप से महिलाएं विधायक या सांसद बनेंगी तो आम महिलाओं की आवाज संसद व विधानसभा में उठा सकेंगी।
-स्वतंत्र बाला चौधरी, पूर्व विधायक, फतेहाबाद