बिश्नोई मंदिर में आयोजित सत्संग में प्रवचन करते स्वामी सच्चिदानंद आचार्य। संवाद
फतेहाबाद। आज के समय में मनुष्य अपनी बुद्धि को जोर देना कम कर रहा है। अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का जमाना गया है। लोग अपनी बुद्धि पर थोड़ा सा भी जाेर देने की जहमत नहीं उठाते और सब कुछ मशीन के भरोसे होता जा रहा है। एआई के युग में हमें कुछ बुनियादी बातें या चीजें याद रखनी चाहिएं।
यह बात मुक्ति धाम मुकाम से कथावाचक महंत स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने कही। वह बिश्नोई धर्म के 541वें स्थापना दिवस पर सिरसा रोड पर स्थित बिश्नोई मंदिर में सात दिवसीय जांभाणी हरिकथा में प्रवचन कर रहे थे। दोपहर 12 बजे जांभाणी हरिकथा का शुभारंभ किया गया।
इस दौरान बिश्नोई सभा प्रधान नरसीराम, विनोद काकड़, अनिल सिहाग समेत कई श्रद्धालु मौजूद रहे। आचार्य ने जो चीजें काम की हैं आज उसे यंत्र में रखते जा रहे है और जो चीजें बेकार की है उनको दिमाग में रखते है।
विकार तो हमारे मस्तिष्क में है और जो स्वीकार करना चाहिए था उसको मोबाइल में सेव किया हुआ है। पुरानी पीढ़ी तो फिर भी इससे कम प्रभावित है, लेकिन नई पीढ़ी तो बस इसके ही सहारे चल रही है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान ने पहले हमें शारीरिक रूप से हमें पहले सुविधाएं दी, पैदल न चलना पड़े साइकिल बना दी, मोटर साइकिल बना दी, फिर चार पहिया वाहन बना दिए। दिमाग के ऊपर बड़ा जाेर पड़ता है, तो विज्ञान ने एआई का आविष्कार कर दिया।