लेकिन पंजाब के अंतिम गांव मोफर से पिलछियां प्रवेश करने पर आपको हरियाणा पुलिस का नाका नहीं, बल्कि देसी शराब का ठेका मिलेगा।
ऐसे में कई बार इस जगह पर आए दिन शराब के नशे में लोगों को हुड़दंग करते देखा जा सकता है। मतलब साफ है कि फतेहाबाद पुलिस पंजाब बार्डर से नशे की खेप या नशेड़ियों को लेकर कितना गंभीर है।
ऐसा न होता तो यहां पर पुलिस नाका या चेकिंग जरूर होती। फिलहाल ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिल रहा है। इधर बीते दिन ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम द्वारा कार्रवाई पर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या टीम को अब तक कुछ विशेष मिला।
जवाब नहीं में था तो उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि नशेड़ी और उनको नशा मुहैया करवाने वाले प्रशासन से कहीं आगे हैं।
पिलछियां से 5 किमी दूर अलीका में लगा है पुलिस नाका
एसपी-मंत्री विवाद का मुख्य कारण अलीका गांव में नशे का कारोबार था तो पुलिस ने बिना जमीनी हकीकत जाने आनन-फानन में अलीका में पुलिस नाका लगाकर वहां निगरानी के लिए पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी।
नाके के लिए महज 3 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है जो न केवल नाकाफी है बल्कि खुद पुलिस कर्मियों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा है।
जमीनी हकीकत को देखते हुए अलीका की बजाए पिलछियां में पंजाब बार्डर पर नाका लगाया जाता तो नशे को लेकर कड़ी कार्रवाई की जा सकती थी।
अलीका के कुछ युवक नशे की गिरफ्त में, अधिकतर नशेड़ी पंजाब के
अलीका निवासियों की मानें तो 7 हजार से अधिक आबादी वाले अलीका गांव के कुछ ही युवक नशे की गिरफ्त में हैं। पंजाब से आने वाले नशेड़ियों के कारण अलीका ज्यादा बदनाम हो गया है।
गांव वालों की मानें तो पंजाब के युवक अलीका, पिलछियां और नागपुर जैसे सीमावर्ती गांवों में आकर अवैध रूप से शराब और मेडिकल नशे का कारोबार करते हैं। उसके बाद अलीका इलाके में ही नशा करके गिरते-पड़ते वापस पंजाब की ओर भाग जाते हैं।
देखते हैं विज-एसपी विवाद के एक माह बाद कितनी कार्रवाई करती है पुलिस- ग्रामीण
पंजाब से सटे पिलछियां और अलीका गांव के लोग गांव में नशे की बढ़ती लत के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं।
गांव के लोगों का आरोप है कि न तो गांवों में पुलिस छापेमारी करती है और न ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। हालांकि बीते दिन ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम द्वारा कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि क्या उनको कुछ मिला।
जवाब नहीं में था तो उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि नशेड़ी और उनको नशा मुहैया करवाने वाले सरकारी प्रशासन से कहीं आगे हैं। उन्होंने कहा कि अब मंत्री-एसपी का विवाद हो गया है तो पुलिस कार्रवाई कर रही है।
एक माह बाद देखेंगे कि पुलिस कितनी छापेमारी करती है और कितनी छापेमारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी करते हैं।
नशे को जड़ से उखाड़ फेकेंगे : कुलदीप
पुलिस अपनी जिम्मेदारी को पूरी शिद्दत से निभा रही है। नशे के व्यापार में काफी कमी आई है। अधिकारियों का पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिल रहा है।
जल्दी ही इलाके से नशे को जड़ से उखाड़ फेकेंगे। अधिकारियों के आदेश के बाद ही अलीका गांव के पास नाका लगाया गया है।
कुलदीप, नागपुर चौकी प्रभारी, फतेहाबाद ।