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Fatehabad News: फसल खराब होने पर अब 30 की जगह 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा

Mon, 26 Oct 2026 10:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद क्षेत्र में उगाई गई धनियां की फसल। संवाद
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फतेहाबाद। प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान से राहत देने के लिए बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा राशि बढ़ाई गई है। अब फलदार फसलों के खराब होने पर किसानों को अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिलेगा।
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सब्जियों और मसालों की फसल खराब होने पर मुआवजा राशि 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। बागवानी बीमा योजना के अंतर्गत कुल 46 प्रकार की फल, सब्जी और मसाला फसलों को शामिल किया गया है। योजना के तहत किसानों को केवल 2.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है, जबकि शेष प्रीमियम राशि सरकार की ओर से वहन की जाती है।
इससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होता है और प्राकृतिक आपदा के कारण फसल खराब होने की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहारा मिलता है। विभाग ने किसानों ने अपील की है कि बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के साथ बीमा योजना का लाभ उठाएं ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके।
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नुकसान के आधार पर मिलेगा मुआवजा
योजना के तहत फसल में हुए नुकसान के प्रतिशत के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाता है। 25 प्रतिशत तक नुकसान होने पर मुआवजा नहीं दिया जाता। 26 से 50 प्रतिशत तक नुकसान होने पर सब्जी व मसाला फसलों के लिए 15 हजार रुपये और फलदार फसलों के लिए 20 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा निर्धारित है। 51 से 75 प्रतिशत तक नुकसान पर यह राशि क्रमश: 22,500 और 30 हजार रुपये प्रति एकड़ है। 75 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर निर्धारित दरों के अनुसार सब्जी व मसाला फसलों के लिए 30 हजार रुपये और फलदार फसलों के लिए 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मिलता है। संशोधित दरों के अनुसार अधिकतम मुआवजा राशि बढ़ाई गई है।

सब्जियों से लेकर फल व मसालों तक सुरक्षा
खंड सहायक बागवानी अधिकारी डॉ. पवन बाना ने बताया कि इस योजना में अरबी, भिंडी, करेला, घीया, बैंगन, पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, टमाटर, आलू, मटर, प्याज, खीरा, तरबूज और खरबूजा सहित विभिन्न सब्जियां शामिल हैं। वहीं, आम, अमरूद, किन्नू, अनार, अंगूर, लीची, नींबू, संतरा, बेर, आंवला, ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी सहित कई फल भी योजना के दायरे में आते हैं। हल्दी और लहसुन जैसी मसाला फसलों को भी इसमें शामिल किया गया है।
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:: जिला बागवानी विभाग की ओर से किसानों को योजना का लाभ उठाने और पारंपरिक खेती के साथ सब्जियों, फलों व मसालों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। योजना के तहत किसानों को निर्धारित प्रीमियम राशि जमा कर अपनी फसलों का बीमा करवाने की सुविधा दी गई है।
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- डॉ. राजेश स्वामी, जिला बागवानी अधिकारी, फतेहाबाद।

फतेहाबाद क्षेत्र में उगाई गई धनियां की फसल। संवाद

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