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अगर प्यास बुझानी है तो जान जोखिम में डालनी ही पड़ेगी

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गांव पिरथला में सूखा पड़ा जलघर का टैंक। - फोटो : Fatehabad
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समैन। टोहाना खंड के कई गांवों में पीने के पानी को लेकर संकट है। कुछ गांवों में तो हालात इतने खराब हो चुके हैं कि भीषण गर्मी के बीच अपनी प्यास बुझाने के लिए बच्चे अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर भाखड़ा नहर से पीने का पानी भरकर लाते हैं।
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गांव पारता, पिरथला, ठरवा, ठरवी व डांगरा में भीषण गर्मी में पीने का पानी नहीं मिल रहा। पिछले 15 दिनों से माइनर बंद रहने से हालात बिगड़े हैं। गांव पारता व पिरथला के ग्रामीण पीने का पानी भाखड़ा नहर से लेकर आते हैं। इनमें कई परिवारों के छोटे बच्चे भी पानी भरने आते हैं।
पारता में पीने के पानी की कमी
गांव पारता में पीने के पानी को लेकर स्थिति काफी खराब है। निवर्तमान सरपंच पवन महला ने बताया कि गांव के जलघर के टैंक में मात्र आठ दिन का पानी स्टोर किया जा सकता है। पिछले 13 दिनों से माइनर बंद होने से जलघर के टैंक सूखे पड़े हैं। टैंकों में अगर ट्यूबवेल का पानी भरकर सप्लाई किया जाए, तो वह पीने लायक नहीं है। मजबूरन ग्रामीणों को भाखड़ा नहर से पानी का इंतजाम करना पड़ता है।
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माइनर में जल्द पानी नहीं आया तो रहना पड़ेगा प्यासा
गांव पिरथला, ठरवा व ठरवी में पीने के पानी को लेकर हालात इतने अधिक बिगड़ चुके हैं कि यदि सोमवार तक माइनर में पानी नहीं आया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। गांव पिरथला में एक जलघर है, जिसमें तीन टैंक बने है। इस जलघर से पिरथला सहित ठरवा व ठरवी गांव को भी पानी सप्लाई होता है। गांव पिरथला के सरपंच प्रतिनिधि डॉ. दलबीर सिंह बताते हैं कि गांव में पीने के पानी को लेकर स्थिति काफी खराब है। जलघर के टैंक सूख चुके हैं। ठरवा व ठरवी में भी यही हाल है।
गांव पिरथला, पारता, ठरवा व ठरवी में पीने की सप्लाई से संबंधित समस्या अस्थायी है। अगले 15-20 दिनों तक पीने के पानी की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। उसके बाद दिक्कत नहीं होगी।
-दलविंदर सिंह, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
गांवों में पीने के पानी से संबंधित कोई शिकायत मेरे पास नहीं आई है। यदि गांव के लोग या सरपंच इस बारे में कोई शिकायत करते हैं तो इस संबंध में जरूरी कदम उठाएंगे।
-आदर्श सिंगला, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
10 साल में भाखड़ा नहर में 8 की हो चुकी मौत
उधर, गांव गाजुवाला के ग्रामीण बताते हैं कि भाखड़ा नहर में नहाते वक्त या पानी भरते समय आठ लोगों की मौत हो चुकी है। गांव के निवर्तमान सरपंच विजय हरिपाल, प्रदीप सिंह व ओमप्रकाश सिहाग ने बताया कि 3-4 साल पहले तक उनके गांव से काफी संख्या में युवा इस नहर पर नहाने या पानी भरने के लिए आते थे, लेकिन उन्होंने गांव के नौजवानों को इसके लिए जागरूक किया। अब यह संख्या नाममात्र है। यदि प्रशासन यहां स्टील की ग्रिल लगाकर पानी भरने या नहाने के लिए व्यवस्था कर दे तो इन हादसों में काफी कमी आ सकती है।

भाखड़ा नहर से पीने का पानी भरते बच्चे।- फोटो : Fatehabad

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