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Fatehabad News: कैसे हो हैप्पी कार्ड का वितरण, 1800 लोगों के फोन आ रहे बंद, कुछ की हुई मौत

Mon, 01 Dec 2025 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद के नए बस स्टैंड परिसर में वितरण के बकाया पड़े हैप्पी कार्ड। संवाद
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फतेहाबाद। हरियाणा सरकार की हैप्पी कार्ड योजना के तहत अंत्योदय परिवारों को रोडवेज बसों में सालाना 1000 किलोमीटर तक मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है, लेकिन जिले के 5 हजार लाभार्थी अब तक इन कार्डों को लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। बस स्टैंड परिसर में करीब 5037 हैप्पी कार्ड तैयार रखे हैं, लेकिन लाभार्थियों ने इन्हें लेने से इन्कार किया है।
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रोडवेज अधिकारियों ने बताया कि मुख्यालय से 1,55,097 कार्ड भेजे गए थे, जिनमें से 1,50,060 का वितरण हो चुका है। बाकी कार्ड लाभार्थी न लेने, मोबाइल नंबर बंद होने और संपर्क न हो पाने के कारण पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाए। रोडवेज कर्मचारियों ने लाभार्थियों से कई बार दिए गए मोबाइल फोन नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। इस दौरान करीब 1800 फोन नंबर बंद पाए गए।

कुछ लाभार्थियों ने कार्ड लेने से इन्कार किया, क्योंकि उनका कहना था कि उन्होंने आवेदन नहीं किया था। इसके अलावा, कई लाभार्थी विदेश या राज्य से बाहर चले गए हैं, जिससे कार्ड का वितरण और मुश्किल हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि योजना का उद्देश्य अंत्योदय परिवारों को बस यात्रा में सुविधा प्रदान करना है, लेकिन लाभार्थियों की अनिच्छा से इसका लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा।
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कार्ड वितरण के लिए जिले के 85 गांवों में जाकर लगा चुके हैं कैंप

रोडवेज की ओर से हैप्पी कार्ड के वितरण के लिए विशेष रूप से जिले के 85 गांवों में हैप्पी कार्ड के वितरण को लेकर विशेष कैंप लगाए जा चुके हैं। जिसके तहत करीब 20 हजार हैप्पी कार्ड का वितरण किया जा चुका है। वहीं रोडवेज अधिकारियों के अनुसार लगाए गए कैंप व बस स्टैंड कार्यालय में कार्ड के लिए आए अधिकतर लोग कार्ड को शुरू करने के लिए लगने वाली 50 रुपये की फीस भी नहीं देना चाहते। सबसे बड़ी दिक्कत यही आ रही है।

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50 रुपये शुल्क को बना रहे बहाना

रोडवेज के यातायात प्रबंधक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अधिकांश लोग कार्ड बनवाने के बाद जब कार्ड लेने के लिए आते है तो वह 50 रुपये का शुल्क जमा करने के नाम पर बहाना बना देते हैं और कार्ड नहीं लेकर जाते हैं। हैप्पी कार्ड के लिए लाभार्थी को केवल 50 रुपये का टोकन शुल्क देना होता है, जबकि कार्ड की वास्तविक लागत और वार्षिक रखरखाव शुल्क सरकार वहन करती है। लाभार्थी कर्मचारियों पर आरोप लगाते है कि ये 50 रुपये सरकार नहीं कर्मचारी ले रहे है लेकिन यह फीस सरकार की ओर से निर्धारित की गई है।
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