फतेहाबाद। जिले में इस वर्ष धान की कटाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। जिले के किसानों ने पराली प्रबंधन में अधिक सहयोग किया है। इसके चलते इस बार केवल 37 स्थानों पर फसल अवशेष जलाए गए, जबकि पांच वर्ष पहले यह संख्या 897 थी। इस बार कुल 19,690 किसान हाथ से धान की कटाई में लगे रहे।
धान की एमएसपी पर खरीद 22 अक्तूबर से 15 नवंबर तक जारी रही, जिससे किसानों ने कटाई में तेजी लाई। वहीं, बासमती धान की कटाई 25 नवंबर तक पूरी हो गई। जिले में इस साल कुल 3,61,394 एकड़ में धान रोपाई की गई थी, जिसमें 47,735 किसानों ने फसल अवशेष न जलाकर पराली प्रबंधन अपनाया। इससे पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिली है।
पिछले सप्ताह से फसल अवशेष जलाने के लिए कोई नई लोकेशन नहीं आई। इस बार सैटेलाइट निगरानी से 51 स्थान गलत पाए गए, जिसके कारण पुलिस और कृषि विभाग के कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया। अब सैटेलाइट से लोकेशन की निगरानी रविवार से हटा दी गई है।किसान अब गेहूं की बिजाई में लगे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली प्रबंधन अपनाने से न केवल पर्यावरण को लाभ मिला है, बल्कि खेत की मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी।
-
इस प्रकार हुआ पराली प्रबंधन
जिले में कुल धान के रकबे में से 181636 एकड़ में 26,5,30 किसानों ने फसल अवशेष में सुपर सीडर मशीन से गेहूं की सीधी बिजाई की है। 21,696 किसानों ने 160066 एकड़ में पराली की गांठ बनाकर बेची है। वहीं 4224 किसानों ने 19690 एकड़ की धान की कटाई का काम हाथ से किया है। सरकार की ओर से पराली प्रबंधन करने पर अनुदान राशि दी जानी है, जिसमें सीधी बिजाई पर प्रति एकड़ 4500 रुपये, पराली की गांठ बनाने पर 1200 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाना है।
-
पिछले पांच सालों में जलाएं गए फसल अवशेष व सेटेलाइट से प्राप्त लोकेशन
साल-प्राप्त लोकेशन- सही लोकेशन-गलत लोकेशन
2021-1479-897-582
2022-767-459-308
2023-579-417-162
2024-130-72-58
2025-88-37-51
:: सरकार की ओर से पराली प्रबंधन के लिए जारी किया गया जागरूकता अभियान से किसानों का रुझान पराली प्रबंधन के प्रति बढ़ा है। पिछले पांच सालों में पराली जलाने के मामलों में 90 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज हुई है। विभाग का लक्ष्य है अगले वर्ष जीरो लोकेशन होगी।
-डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।