फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल का नेत्र विभाग खुद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। यहां रोजाना 100 से 120 मरीज आंखों की जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं लेकिन जरूरी आधुनिक मशीनों के अभाव में मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
विभाग में यैग लेजर और ओसीटी मशीन की सुविधा नहीं है। इससे आंखों के पर्दे यानी रेटिना से जुड़ी बीमारियों की सटीक जांच और कुछ समस्याओं के उपचार में दिक्कत आती है। वहीं अस्पताल में नेत्रदान के लिए काउंसलर भी नियुक्त नहीं है। ऐसे में नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और इच्छुक परिवारों को जरूरी जानकारी देने का काम भी प्रभावित हो रहा है।
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ओसीटी से दिखती है पर्दे की अंदरूनी स्थिति
ओसीटी यानी ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी आंखों के पर्दे (रेटिना) और मैक्युला की परतों की विस्तृत तस्वीरें तैयार करने वाली जांच है। इससे रेटिना में सूजन, उसके नीचे तरल जमा होने और डायबिटीज या अन्य बीमारियों के कारण होने वाले बदलावों का पता लगाने में मदद मिलती है। पर्दे की सूजन के मामलों में यह जांच बीमारी की गंभीरता समझने और इलाज के असर का आकलन करने में उपयोगी होती है। मशीन नहीं होने पर जरूरतमंद मरीजों को जांच के लिए दूसरे केंद्रों पर जाना पड़ सकता है।
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यैग लेजर से दूर होती है कुछ मरीजों की परेशानी
यैग लेजर का इस्तेमाल मुख्य रूप से मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद कुछ मरीजों में लेंस के पीछे झिल्ली धुंधली होने पर उसे साफ करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, विशेष परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल आंखों के दबाव से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी होता है।
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नेत्रदान के लिए काउंसलर की जरूरत
नेत्रदान काउंसलर लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, इससे जुड़े भ्रम और मृत्यु के बाद समय पर आंखें दान करने के महत्व की जानकारी देता है। वह इच्छुक लोगों और उनके परिजनों को जागरूक करने के साथ नेत्रदान की इच्छा दर्ज कराने तथा जरूरत पड़ने पर नेत्र बैंक से संपर्क और समन्वय में मदद करता है।
ओसीटी जांच से रेटिना की परतों और उसमें होने वाली सूजन का पता लगाने में मदद मिलती है। यैग लेजर की जरूरत कुछ मरीजों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद लेंस के पीछे झिल्ली धुंधली होने पर पड़ती है। दोनों की उपयोगिता अलग-अलग है। इन मशीनों की डिमांड की गई है अगर ये मिलती हैं तो मरीजों को फायदा मिलेगा।
- डॉ. राकेश कसवां, नेत्र रोग विशेषज्ञ