फतेहाबाद। हेपेटाइटिस सी का उपचार लेने के बाद भी शरीर से कीटाणु खत्म नहीं हुए हैं या फिर जांच में गंभीर हेपेटाइटिस सी मिलता है तो अब उपचार के लिए रोहतक पीजीआई जाने की जरूरत नहीं है। जिला मुख्यालय के नागरिक अस्पताल में ही मरीज को अब उपचार मिल सकेगा। रोहतक पीजीआई में मिलने वाली दवाइयां अब नागरिक अस्पताल में ही उपलब्ध होंगी। इससे अब मरीजों को रोहतक पीजीआई के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
हेपेटाइटिस उपचार के लिए मरीज को दिए जाने वाले रिबावरीन कैप्सूल अब नागरिक अस्पताल में ही उपलब्ध हो गए हैं। हेपेटाइटिस सी के लक्षण दिखने पर स्वास्थ्य विभाग में निशुल्क जांच की जाती है और उसमें पुष्टि होने पर दवा शुरू की जाती है। मरीज को तीन माह तक दवा खानी पड़ती है। इसके के करीब तीन माह बाद दोबारा जांच करवाई जाती है। अगर जांच में मिलता है कि शरीर में अभी भी किटाणु हैं तो रिबावरीन कैप्सूल शुरू किए जाते है। पहले मरीज को ये उपचार लेने के लिए रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता था लेकिन अब यहीं ये उपचार शुरू कर दिया गया है। जिले में हेपेटाइटिस सी के 5726 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। बहुत थकान महसूस होना, मांसपेशियों में दर्द होना, बुखार, उल्टी आना, त्वचा में खुजली आदि आना हेपेटाइटिस सी के लक्षण है। संवाद
जिले में हेपेटाइटिस मरीजों की स्थिति
हेपेटाइटिस सी मरीज मिले : 5726
हेपेटाइटिस बी मरीज मिले : 250
अब तीन माह की मिलेगी हेपेटाइटिस सी की दवा
हेपेटाइटिस सी के मरीजों को दवा लेने के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। अब पूरे कोर्स की दवा मरीज एक साथ ले सकते हैं। तीन माह की दवा एक साथ दी जाएगी। पहले एक-एक माह की दवा दी जाती थी। फिलहाल 5726 मरीजों में से 102 मरीज उपचार ले रहे हैं।
हेपेटाइटिस बी के 250 मरीज ले चुके उपचार
हेपेटाइटिस बी के मरीजों पहले उपचार के लिए रोहतक पीजीआई जाना पड़ता था लेकिन अब यहीं उपचार शुरू हो चुका है। 250 मरीज उपचार ले रहे है। ये एक संक्रमित बीमारी है। यह संक्रमित रक्त चढ़ाने, संक्रमित सूई का इस्तेमाल करने के कारण एक-दूसरे में फैलता है। हेपेटाइटिस बी के लक्षण जल्द नहीं दिखते हैं। लीवर पर असर दिखने के बाद इसके लक्षण सामने आते हैं। इसके बाद जांच करवाई जाती है। जांच में बीमारी का प्रभाव अगर बिल्कुल कम होता है तो दवा शुरू करने की जरूरत नहीं होती है। अगर ज्यादा है और लीवर पर असर कर रहा है तो मरीज को करीब दो साल तक दवाई खानी पड़ती है। वहीं गंभीर अवस्था लीवर तक डैमेज हो जाता है। इस अवस्था में पूरी उम्र दवाई खानी पड़ती है। वहीं मरीज को हर साल इसका टेस्ट करवाना होता है।
कोट
हेपेटाइटिस सी का कोर्स पूरा करने के बाद भी शरीर में कीटाणु रह जाते हैं। तीन माह दवा खाने के तीन माह बाद ये जांच करवाई जाती है। उसमें अगर मरीज पॉजिटिव मिलता है तो रिबावरीन कैप्सूल शुरू किया जाता है, ये दवा लेने के लिए रोहतक पीजीआई जाना पड़ता था लेकिन अब ये दवा स्वास्थ्य विभाग ने यहीं उपलब्ध करवा दी है।
-डॉ. मनीष टुटेजा, नोडल अधिकारी, नागरिक अस्पताल