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टेंडर खत्म होने से हेपेटाइटिस सी के निशुल्क टेस्ट के कूपन खत्म, इलाज बंद

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नागरिक अस्पताल में कूपन न होने के कारण खाली पड़ी ओपीडी - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। हेपेटाइटिस सी यानी काला पीलिया के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दिया जाने वाला टेस्ट और उपचार सुविधा बंद हो गई है। विभाग के पास उपचार और दवाई के लिए कूपन आने बंद हो गए हैं। इसके पीछे कारण यह है कि स्वास्थ्य विभाग का जिस फर्म के साथ उपचार और दवाइयों को लेकर टेंडर था वह खत्म हो गया है, अभी नया टेंडर विभाग ने जारी नहीं किया है। हालांकि जिन मरीजों का पहले उपचार चल रहा है उन्हें दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं लेकिन जो नए मरीज आ रहे हैं उनके टेस्ट और उपचार को होल्ड पर रखा गया है। विभाग कब नया टेंडर जारी करेगा और कब इनका उपचार शुरू होगा, इसका अभी अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है।
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काला पीलिया के मरीजों को पहले रोहतक पीजीआई जाना पड़ता था, यहां भी सिर्फ बीपीएल कार्ड धारकों का ही उपचार निशुल्क होता था, अन्य कैटेगरी के मरीजों को उपचार के लिए भारी भरकम रकम खर्च उठाना पड़ रहा था। फरवरी 2017 में विभाग ने जीवन रेखा के तहत प्रोजेक्ट की शुरूआत की। इसके तहत जिला स्तर पर उपचार शुरू किया गया, इसमें सभी कैटेगरी के मरीजों को शामिल किया गया। जिला में अब तक 3500 मरीज उपचार भी ले चुके हैं। हालांकि इस बीमारी से संबंधित अभी काफी मरीज सामने आ रहे हैं।
टेस्ट में पुष्टि के बाद डॉक्टर शुरू करते हैं उपचार
स्वास्थ्य विभाग उपचार शुरू करने से पहले वायरल लोड व जिनोटाइप टेस्ट करवाता है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद मरीज का उपचार शुरू किया जाता। मरीज का तीन माह तक उपचार चलता है, अगर लीवर खराब है तो मरीज को छह माह तक दवाई खानी पड़ती है। मुख्यालय ने टेस्ट के लिए कंपनी के साथ अनुबंध कर रखा है, ये कंपनी मरीज का टेस्ट निशुल्क करती है।
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जानिए कैसे फैलता है हेपेटाइटिस
डॉक्टरों के मुताबिक हेपेटाइटिस सी बीमारी खून से फैलती है। झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा एक सीरिंज का बार-बार इस्तेमाल करने, नशा करने वाले लोगों द्वारा एक ही सीरिंज का प्रयोग करने, नाई की दुकान पर एक ही फिटकरी का इस्तेमाल करने और काला पीलिया के मरीज का नेल कटर, टूथ ब्रूश का इस्तेमाल करने से फैलती है।
नए टेंडर में शामिल होगा हेपेटाइटिस बी का भी उपचार
2017 में जीवन रेखा के नाम से प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, जिसे राज्य स्तर पर शुरू किया गया था। इसे केंद्र सरकार ने भी सराहा है। अब इसे नेशनल स्तर पर शुरू किया जा रहा है। जिसे नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम का नाम दिया गया है। इसके तहत अब हेपेटाइटिस सी के साथ-साथ अब हेपेटाइटिस बी का उपचार भी शुरू होगा। केंद्र सरकार दवाइयों की खरीद करेगी।
क्या है जिला में स्थिति
रजिस्टर्ड मरीज - 4200
उपचार पूरा हुआ - 3500
उपचार चल रहा - 200
उपचार की जरूरत नहीं पड़ी - 500
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हेपेटाइटिस सी के टेस्ट और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग कूपन उपलब्ध करवाता है। इसके तहत मरीजों के निशुल्क टेस्ट और दवाइयां मिलती हैं। विभाग का जिस कंपनी के साथ टेंडर था वह खत्म हो गया है, इसके चलते टेस्ट बंद हो गए हैं और जो पुराने मरीज दवाई ले रहे थे, उनकी दवाई चल रही है। नए मरीजों को एक बार इंतजार करने के लिए कहा गया है। इसका टेंडर मुख्यालय स्तर पर होना है। उम्मीद है जल्द ही टेंडर हो जाएगा।
- डॉ. अजय चुघ, फिजिशियन एवं नोडल अधिकारी
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पुराना टेंडर खत्म हो गया था, नए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है 24 दिसंबर तक टेंडर हो जाएगा और पहले की तरह मरीजों को उपचार और टेस्ट की सुविधा मिलेगी।
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- डॉ. सूरजभान कंबोज, स्वास्थ्य महानिदेशक, पंचकूला
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