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टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग नहीं बना पाया रणनीति

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कोरोना से बचाव का टीका लगवाता पात्र। - फोटो : Fatehabad
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टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग नहीं बना पाया रणनीति
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जिले में कोरोना टीकाकरण की रफ्तार कम, 12 से 14 आयु वर्ग के मात्र 15 फीसदी को ही लगी वैक्सीन
फोटो 19
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। 16 मार्च से आरंभ हुए राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर 12 से 14 साल के बच्चों को कोविड-19 का टीका लगाने का काम बेहद सुस्त चल रहा है। इस अभियान के आरंभ होने के 23 दिनों तक अभी तक मात्र 15 फीसदी बच्चों को ही डोज लगाई गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग स्कूलों में कैंप तो लगा रहा है, लेकिन विभाग की टीकाकरण राजनीति सही नहीं होने के कारण बच्चों को टीका लगाने के काम की रफ्तार कछुआ चाल की तरह है।
फतेहाबाद में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर 12 से 14 साल के बच्चों को कोरोना का टीका लगाने का कार्य आरंभ किया गया था। यह टीकाकरण स्कूलों व सभी सरकारी अस्पतालों में आरंभ हो गया था, लेकिन इसकी रफ्तार अभी तक नहीं बढ़ पाई है। विभाग की ओर से सभी निजी व सरकारी स्कूलों में इन बच्चों के टीकाकरण के लिए कैंप भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन बच्चों को टीका लगाने का टारगेट अभी तक पूरा नहीं हुआ है। अब तक 12 से 14 साल के मात्र 15 फीसदी बच्चों का ही टीकाकरण हो पाया है।
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55 हजार बच्चों को टीका लगाने का है लक्ष्य
फतेहाबाद जिले में स्वास्थ्य विभाग ने 12 से 14 साल के 55 हजार बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा है। 16 मार्च से अब तक 6857 बच्चों को पहली डोज व 1399 बच्चों को दूसरी डोज ही लगाई जा सकी है। बच्चों को टीकाकरण का यह 23वां दिन है, लेकिन उम्मीद के मुुताबिक टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। बड़ी बात यह है कि अभिभावक भी अपने बच्चों को टीका लगवाने में अधिक दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
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फतेहाबाद में अब तक हुए टीकाकरण की रिपोर्ट
उम्र पहली डोज दूसरी डोज बूस्टर डोज
60 साल से ऊपर 84200 64183 2172
45 से 59 साल 144084 119297 51
18 साल से ऊपर 402597 266690 28
15 से 17 साल 38612 12945 ...
12 से 14 साल 6857 1399 ...
कोट
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 12 से 14 साल के बच्चों को कोरोना का टीका लगाने का काम जारी है। स्कूलों में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की ओर से कैंप लगाकर स्कूल आनेे वाले बच्चों को टीके लगाए जा रहे हैं। कुछ स्कूल संचालक व अभिभावक इस अभियान में साथ नहीं दे रहे हैं, जिस कारण बच्चों को टीका लगाने की रफ्तार में कमी आई है।
-डॉ. सुनीता सोखी, नोडल ऑफिसर, स्वास्थ्य विभाग
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