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सुशासन और मानवाधिकार का चोली-दामन का साथ : जैन

Tue, 31 May 2016 11:49 PM IST
फतेहादबाद ब्यूरो/ अमर उजाला
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पत्रकारों से बातचीत करते आयोग के चेयरमेन जस्टिस विजेंद्र जैन। - फोटो : amar ujala
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन जस्टिस विजेंद्र जैन ने कहा है कि सुशासन और मानवाधिकार का चोली-दामन का साथ है। व्यक्ति को जन्म से ही मानवाधिकार प्राप्त हो जाते हैं, इसलिए उनके मांगने या न मांगने का अर्थ ही नहीं रहता है। जस्टिस जैन भूना रोड स्थित फाइव एकड़ बैंक्वेट हॉल में आयोग के नशा, कन्या भ्रूण हत्या, बंधुआ मजदूरी और महिला तस्करी विषय पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इस सेमिनार में पंचायत प्रतिनिधि, आंगनवाड़ी वर्कर, स्कूली बच्चे, पार्षद, अध्यापक और अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे।
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सुशासन प्रदान करना सरकार का दायित्व
    जस्टिस जैन ने कहा कि मनुष्य को अपने जन्म से ही खुली हवा में सांस लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने जैसे अधिकार मूलरूप से ही मिल जाते हैं। सुशासन व्यक्ति का मौलिक और जन्मसिद्घ अधिकार है। सरकारों को सुशासन प्रदान करना नैतिक जिम्मेदारी बनती है। ऐसी धारणा बन चुकी है कि हमें शासन और प्रशासन से सुविधाएं मांगना ही है। उन्होंने कहा कि सुशासन के अंतर्गत शासन में भ्रष्टाचार न हो, पारदर्शिता और समस्याओं का निवारण प्रमुखता से आता है और हमारी सरकारों का भी यह दायित्व है कि वे हमें यह सुशासन प्रदान करें।

अधिकारों का हनन हो, तो आएं आयोग के पास
  हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य एवं रिटायर्ड आईएएस जेएस अहलावत ने सेमिनार का महत्व बताते हुए कहा कि हमारा मकसद लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी देना है और उनके अधिकारों का हनन हो रहा है, तो वे आयोग के पास आ सकते हैं।   हर व्यक्ति को उसके अधिकार मिलें, इसके लिए हमें प्रयास करने होंगे।
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    सेमिनार में उपायुक्त एनके सोलंकी ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि यह सेमिनार आने वाले समय में जिला में सार्थक परिणाम लेकर आएगा। ऐसे सेमिनार से जहां जनता में जागरूकता आती है, वहीं प्रशासन के कार्यों में भी पारदर्शिता दिखती है। मानवाधिकार आयोग की सचिव व महिला एवं बाल विकास विभाग की महा निदेशक रेणु एस फुलिया ने कहा कि सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत अनेक कल्याणकारी योजनाएं भी चलाई गई हैं, जिनका धरातल पर परिणाम भी देखने को मिल रहा है।

सेमिनार में प्रो. रेखा शर्मा ने बेटियों की असुरक्षा बारे में चिंतन व्यक्त करते हुए युवाओं के नैतिक मूल्यों में गिरावट को दोषी करार दिया और नैतिक मूल्यों को बढ़ाने के लिए और अच्छे संस्कार स्थापित करने के लिए परिवार को प्राथमिक स्कूल बताया। उन्होंने कहा कि यह समस्या नैतिक और चरित्र निर्माण से ही दूर हो सकती है। प्रो. विष्णु भगवान ने नशा पर अपने व्याख्यान में पब्लिक-प्राइवेट, पेरेंट्स व पंचायती राज की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनके आपसी सामंजस्य से ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने नुक्कड़ नाटक और हरियाणवी संगीत के माध्यम से सामाजिक बुराइयों नशा और कन्या भ्रूण हत्या बारे जागरूकता का संदेश भी दिया।

मानवाधिकार आयोग के डीजीपी जांच एके ढुल ने भी सेमिनार में अपना संबोधन किया। मुख्य अतिथि ने स्कूली बच्चों की प्रतियोगिता के विजेता और सेमिनार में जागरूकता संदेश देने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोग के रजिस्ट्रार एससी गोयल, सीजेएम मधुलिका, एडीसी डॉ. जेके आभीर, एसडीएम संतलाल पचार, सतीश कुमार, सीटीएम सुरेंद्र पाल, आयोग के एएसपी धीरज सेतिया, डीईईओ कृष्णा सिहाग, डिप्टी डीईओ दयानंद सिहाग, पूर्व चेयरमेन एडवोकेट रामराज मेहता, एडवोकेट संतकुमार टूटेजा, विशेष सचिव एलएन मदान, आयोग के पीआरओ जय नारायण कुराड़, ईओ ओपी सिहाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में जिलावासी मौजूद थे।
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