फतेहाबाद में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होना है और चुनाव प्रचार का आधा समय बीत चुका है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा का कोई रोल नजर नहीं आ रहा है।
वर्ना अभी तक तो ऐसा होता आया है कि हरियाणा में विधानसभा चुनावों की दस्तक होते ही राजनीतिक दलों के आकाओं का सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा की हाजिरी भरना शुरू हो जाता था। ये सिलसिला हाल में ही संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में भी देखने में आया था। हालांकि लोकसभा चुनावों में भी इसमें काफी कमी देखी गई थी।
पिछले विस चुनाव में बीजेपी को डेरे ने दिया था ओपन समर्थन
2014 लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र सरकार का गठन हुआ। इसके तुरंत बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए। इन चुनावों में डेरा सच्चा सौदा ने मतदान से दो दिन पहले भाजपा को समर्थन का औपचारिक एलान किया। खुद डेरा प्रमुख पहली बार मतदान करने पोलिंग बूथ पर पहुंचे।
आंकड़े भले ये कहें कि सिरसा संसदीय क्षेत्र की 9 विधानसभा सीटों में से 8 पर बीजेपी को हार मिली। लेकिन यही आंकड़े एक और कहानी भी बयां करते हैं। बीजेपी को टोहाना से जीत मिली। इसके अलावा बाकी 8 में से तीन सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे। नरवाना, रतिया और ऐलनाबाद में बीजेपी दूसरे नंबर पर रही।
बाकी चार सीटों पर बीजेपी भले तीसरे स्थान पर रही, लेकिन उसके वोटों में भारी इजाफा हुआ। फतेहाबाद विधानसभा सीट पर पिछले 10 सालों में बीजेपी को कभी 5 हजार वोट भी नहीं आए थे, लेकिन यहां वो 27 हजार वोटों तक पहुंची। रतिया में महज 4 सौ वोटों से सीट हारी।
नरवाना में हमेशा कांग्रेस और इनेलो में मुकाबला होता आया था, लेकिन 2014 में कांग्रेस दस हजार वोट भी नहीं ले सकी और बीजेपी 63 हजार वोट लेकर दूसरे स्थान पर रही। ऐलनाबाद में अभय चौटाला को बीजेपी से पार पाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।