फतेहाबाद। जिले के सरकारी स्कूलों से हर साल विद्यार्थियों का मोह भंग हो रहा है। पांच साल में जिले के सरकारी स्कूलों से 25 हजार बच्चे कम हो गए हैं। इस बार पिछले साल के आंकड़े तक पहुंचना भी स्कूलों के लिए चुनौती रहने वाला है। कारण अध्यापक पढ़ाई करवाने के लिए हर वो काम कर रहे हैं जो उनका नहीं है। पिछले 5 साल से स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है।
सरकार ने राजकीय स्कूलों के 30 से 40 फीसदी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई है। जनगणना में जिन शिक्षकों की डयूटी नहीं है उनके सामने विद्यार्थियों को संभालना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में बच्चे संभाले या फिर नामांकन बढ़ाने के लिए डोर टू डोर सर्वे करने जाए। वर्ष 2021-22 में जिले में 1.20 लाख बच्चे राजकीय स्कूलों में पढ़ रहे थे लेकिन पिछले साल यह आंकड़ा 95 हजार रह गया है।
साल दर साल सरकारी स्कूलों से बच्चों की संख्या कम हो रही है। पिछले साल जिले में 95 हजार विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था लेकिन इस बार अभी 75 हजार ही नामांकन हुए हैं। दाखिला का माह कहे जाना वाला अप्रैल माह के 11 दिन बीत चुके हैं। ऐसे में इस बार पिछले बार के आंकड़े तक पहुंचने के लिए स्कूलों के लिए मुश्किल बना हुआ है। पिछली बार से अभी 20 हजार बच्चे कम हैं।
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साल दर साल राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या
वर्ष विद्यार्थी
2021-22 1.20 लाख
2022-23 1.13 लाख
2023- 24 1.1 लाख
2024-25 97 हजार
2025-26 95 हजार
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कोरोना महामारी में बढ़े थे 11 हजार बच्चे
जिले में कोरोना महामारी के दौरान करीब 11 हजार बच्चों के दाखिले राजकीय स्कूलों में बढ़े थे लेकिन इसके बाद पहले साल सात हजार और दूसरे साल 12 हजार बच्चे कम हो गए थे। महामारी के चलते अभिभावकों ने निजी स्कूलों की फीस से बचने के लिए अपने बच्चों के दाखिले सरकारी स्कूलों में दाखिले करवाए थे।
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अगर जून में जनगणना शुरू होती तो असर न पड़ता
राजकीय प्राथमिकी शिक्षक संघ के पूर्व में जिला प्रधान रहे और शिक्षाविद् विकास टुटेजा का कहना है कि स्कूलों में स्टाफ है और कुछ की ड्यूटी जनगणना कार्य के लिए लगाई गई है। जो शिक्षक स्कूलों में मौजूद है उन्हें अतिरिक्त कक्षाओं को भी संभालना है। ऐसे में नामांकन के लिए कैसे सर्वे हो सकता है। अगर ये काम जून माह के बाद होता तो अच्छा रहता। स्कूलों में नामांकन संख्या में बढ़ोतरी हो सकती थी।
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शिक्षकों से करवाए जा रहे हैं दूसरे कार्य
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से शैक्षणिक कार्यों की जगह दूसरे काम करवाए जा रहे हैं। शिक्षक स्कूलों में रुक ही नहीं पा रहे हैं, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि राजकीय स्कूलों से हर साल बच्चे कम हो रहे हैं। दूसरा कारण ये भी है कि स्कूलों में छात्र-शिक्षक संख्या अनुपात नहीं है। कहीं शिक्षक ज्यादा हैं तो कहीं कई पद खाली पड़े हैं। प्राइमरी स्कूलों में बच्चे सबसे ज्यादा कम हो रहे हैं।
-देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ