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ग्रीन बेल्ट थी कभी खास, अब नहीं बची हरी घास

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 नेशनल हाईवे पर बनी ग्रीन बेल्ट इन दिनाें प्रशासन की अनदेखी के कारण बदहाली की मार झेल रही है। कहने को तो इसका नाम ग्रीन बेल्ट है, लेकिन इसमें हरियाली कहीं भी नहीं है। आलम यह है कि पूरी ग्रीन बेल्ट सूखी पड़ी है और इसकी ग्रिलें टूटी पड़ी हैं।
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अव्यवस्था के कारण चारों तरफ गंदगी व्याप्त है। पूरा दिन इस गंदगी में पशु घूमते रहते हैं। नेशनल हाईवे पर बस स्टैंड के पास बनी ग्रीन बेल्ट पूरी तरह से उजड़ी हुई है। यहां पर पौधाें के लिए लगाए गए ट्री गार्ड टूटे पडे़ हैं और समय पर पानी न मिलने के कारण पौधे सूख चुके हैं।

 रोजाना यहां रेहड़ी चालक शाम को अपनी बची हुई सब्जियां फेंक जाते हैं, जिसमें आवारा पशु मुंह मारते रहते हैं। पशुओं के पैरों से कुचलने के बाद सड़ती सब्जियां बदबू अलग फैला रही हैं। ग्रीन बेल्ट की यह हालत लगभग एक साल से ऐसी ही है। आवारा पशुओं के घूमने से ग्रीन बेल्ट ग्रिल टूट गई है।
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 पशुओं ने यहां लगे पौधों को उजाड़ दिया है। यहां पानी का कोई स्रोत नहीं है और यदि होता भी कोई पानी देने वाला भी नहीं है। इसलिए पानी न मिलने के कारण ग्रीन बेल्ट की घास सुख चुकी है।


     यहां लगे पौधों में बीमारी लगी हुई है, इससे बचे हुए पेड़ों पर एक भी पत्ता नजर नहीं आता। क्षेत्र के दुकानदारों का कहना है कि  उनकी दुकानों के सामने बने इस ग्रीन बेल्ट के बनते समय उन्हें इस बात की खुशी थी कि उनकी आंखों के सामने हरियाली रहेगी, लेकिन अब उन्हें इस बात का दुख है कि इस तरह का माहौल उन्हें देखना पड़ रहा है। इस ग्रीन बेल्ट के चारों तरफ लगी ग्रिलें टूट गई हैं।

 इसका लोहा दिन प्रति दिन गायब होता जा रहा है। ग्रीन बेल्ट में लगे ट्री गार्ड भी टूटे पड़े हैं जिस कारण छोटे पौधे नष्ट हो गए हैं। लोगों की प्रशासन से मांग है कि इस उजड़ते ग्रीन बेल्ट की तरफ भी ध्यान दें, ताकि हरियाली को वापस लाई जा सके।
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