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अधिकांश राज्यों और गांवों से नहीं रोडवेज की कनेक्टिविटी

Sat, 05 Apr 2014 01:01 AM IST
fatehabad
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 अब भी जिले के लोग दूसरे राज्यों और गांवों तक पहुंचने के लिए रोडवेज की सुविधा से बहुत दूर हैं। अन्य राज्यों में बसों का संचालन नहीं होने के कारण एक ओर जहां सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का घाटा हो रहा है
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 वहीं यात्रियों को उत्तरप्रदेश, राजस्थान के अधिकांश जिलों और पंजाब सहित अनेक राज्यों के लिए दूसरे जिलों में जाकर बसें पकड़नी पड़ती है। ऐसे में यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


फतेहाबाद डिपो से केवल 9 अंतर्राज्यीय रूट पर ही बसें चलती हैं। इनमें दिल्ली के लिए एक दिन में तीन चक्कर तो गंगानगर, जयपुर, चंडीगढ़, हिमाचलप्रदेश के शाहतलाइव के लिए ही सीधी बस सेवा है। इसके अलावा अन्य राज्यों के लिए यहां से सीधी बस सेवा नहीं होने के कारण यात्रियों को सिरसा या हिसार जाकर ही बसें बदलनी पड़ती हैं।
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फतेहाबाद डिपो से जिले के कुल 42 गांवों में रोडवेज सेवा का रात्रि ठहराव है। इसके तहत रतिया, लादूवास, हंसपुर, समैण सहित विभिन्न 42 गांवों में फतेहाबाद डिपो की बसों का आवागमन रहता है।

जिले के कुल 243 गांवों में से सभी गांवों में सरकारी बस सेवा की सुविधा नहीं होने के कारण यात्रियों को निजी वाहनों में अलग-अलग स्थानों में बदलकर आवागमन करना पड़ता है।


फतेहाबाद डिपो के अंतर्गत कुल 103 बसों के संचालन का जिम्मा 137 चालक और 136 परिचालकों पर है। इन्हीं बसों को लंबे और छोटे रूट पर चलाना होता है। यही कारण है कि बसों के रूटों का विस्तार नहीं हो पा रहा है।


कुलां निवासी संदीप कुमार और कुलदीप कुमार का कहना है कि जिन गांवों में बस सेवा है वहां भी सभी जगह बसें नहीं रुकती हैं। इससे उन्हें या तो निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है या फिर दूसरे गांव तक पहुंचकर बसें पकड़नी पड़ती हैं।

 दौलतपुर निवासी राजकीय स्कूल में आने वाले अजय कुमार, रतिया से विशाल कुमार, लिखाटिया गांव के अजय कुमार ने बताया कि रोडवेज बसों के अभाव में प्राइवेट बसों की मनमानी के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 वे अपने हिसाब से बिना किसी समय सारणी के चलते हैं, जिस कारण यात्री अपने गंतव्य पर समय पर नहीं पहुंच पाते। गांव चौबारा निवासी राकेश कुमार, मनोज कुमार सहित अनेक लोगों का कहना है कि सरकारी बसें खाली हो तो भी चल पड़ती हैं रास्ते की सवारियां भरने में रुचि नहीं दिखाते।

 हिसार-भूना मार्ग पर बसों के नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं। सरकारी बसों में पास की सुविधा होती है इसके बावजूद उन्हें निर्धारित रुटों पर बसें नहीं मिल पातीं।


अभी स्टाफ और बसों की जो स्थिति है उसके अनुसार बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। स्टाफ और बसों की सीमित उपलब्धता में ही रूट घटते बढ़ते रहते हैं। जल्द ही शेष रूटों पर भी बसें चलाने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी। अभी जिन रूटों पर बसें चल रही हैं वहां ज्यादा डिमांड है।
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