राइस मिलों में पड़ी धान की बोरियां।
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फतेहाबाद। पिछले दिनों सरकार के आदेशनुसार राइस शैलरों में भौतिक जांच के दौरान फतेहाबाद की 173 राइस मिलों में करीब 2143 मीट्रिक टन धान कम मिलने के मामले में सरकार नोटिस जारी करेगी। इसके बावजूद भी राइस शैलरों में कामकाज सामान्य दिनों की तरह चल रहा है। वजह है जिले की मिलों में 8 लाख 40 हजार मीट्रिक टन धान की मिलिंग हुई थी। ऐसे में मिलर्स व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग दोनों का मानना है कि यह एक फीसदी से भी कम है जो नियम के अनुसार है।
पिछले दिनों सरकार के आदेशानुसार जिले की 173 राइस मिलों का भौतिक निरीक्षण किया गया था। धान सीजन के दौरान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने खरीद एजेंसियों से धान खरीदकर 8 लाख 40 हजार मीट्रिक टन धान की मिलिंग कर दी। इसके एवज में राइस मिल मालिकों ने 67 किलो प्रति क्विंटल की औसत से एफसीआई को चावल देना होता है। सरकार के पास रिपोर्ट थी कि राइस शैलर धान की मिलिंग का फायदा उठाकर इसे बाजार में बेच देते हैं। बाद में बात कागजों मेें रह जाती है। फतेहाबाद में 2143 मीट्रिक टन धान कम पाया गया था। इसके बावजूद अभी जिले में सभी मिलें सामान्य कामकाज कर रही है। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेश जिंदल ने बताया कि जितना धान कम मिला है वो उनके नियम में आता है। सरकार एक फीसदी कटौती को सूखा मानती है। जबकि उनके यहां 400 क्विंटल धान तो फैक्ट्रियों के मशीनों पड़ रहता है। कमी के हिसाब से जिले में मात्र एक फीसदी का चौथा हिस्सा भी नहीं है। ऐसे में उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उन्होंने माना कि सरकार के एसीएस चीफ एडमिनिस्ट्रेटर पीके दास ने नोटिस देने की बात कही है। वह नोटिस में अपना स्पष्टीकरण देने को तैयार है। जिंदल ने कहा कि पीके दास ने अगले वर्ष तक धान की मिलिंग के लिए नई पॉलिसी की बात कही है। जिसका वह स्वागत करते हैं। इस बारे में खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक प्रमोद शर्मा ने कहा कि जिले में 8 लाख 40 हजार एमटी धान की मिलिंग हुई थी, जिनमें 2100 एमटी भौतिक जांच में कम पाया गया। एक फीसदी कटौती को धान में कमी नहीं कह सकते, बाकी जो सरकार से जो दिशा-निर्देश आएंगे वह उसे लागू करेंगे।