टीले से मिली मणि। टीले का खोजकर्ता अजय कुमार।
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मौर्य काल, कुषाण, गुप्तवंश तथा मुगल काल के मिल चुके हैं अवशेष
सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार ने बताया कि यहां एक वॉटर चैनल काफी घेरे में बना हुआ है। यहीं एक कुआं भी है, जो काफी वर्ष पुराना है। संगमरमर के लाल पत्थर के टुकड़े मिले थे, जो दिल्ली के लाल किले के निर्माण में प्रयोग हुआ है। कुषाण समय का एक पत्थर ऐसा है, जो फर्श को चिकना बनाने के लिए प्रयोग होता है। जो चीजें पुरातत्व विभाग को सौंपी गई हैं, वह मौर्य काल, कुषाण, गुप्तवंश तथा मुगल काल के अवशेष हैं। अजय कुमार ने बताया कि यहां संकेत है कि यह महानगर वैदिक काल से अस्तित्व में था, जो सरस्वती नदी के तट पर स्थापित था।
गांव भट्टू से शोधार्थी अजय ने मुझे जानकारी दी है कि यहां पर ऐतिहासिक महत्व की मणि मिली है, जो अपने आप में अलग है। यह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साइट है। यहां पर अक्सर पौराणिक महत्व की वस्तुएं मिलती रहती हैं। इस साइट को जल्द ही पुरातत्व विभाग अपने संरक्षण में लेगा और खुदाई का काम शुरू किया जाएगा। -डॉ.बुनानी भट्टाचार्य, उप निदेशक, पुरातत्व विभाग, हरियाणा