किसान हरविंदर सिंह के खेत मे निरीक्षण करने पहुंचे एसडीएम और अन्य अधिकारी। स्रोत : सूचना विभाग
जाखल। बढ़ते प्रदूषण के लिए फसलों के अवशेष जलाने को बड़ा कारण माना जाता है। सरकार की ओर से हर वर्ष पराली प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक किया जाता है फिर भी ऐसे मामलों पर पूर्णतया रोक नहीं लग पा रही है। ऐसे में गांव चूहड़पुर के किसान हरविंदर सिंह का प्रयास सुखद अहसास कराता है। वह पिछले 13 वर्षों से पराली नहीं जलाकर पर्यावरण प्रहरी बने हैं और दूसरों किसानों के लिए नजीर बने हैं
हरविंदर सिंह 31 एकड़ में खेती करते हैं। 2012 ये वह फसल के अवशेषों को खेतों में ही खाद के रूप में उपयोग करते हैं। वह किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने में जुटे हैं। वह किसानों के बीच जाकर उनको धान के बचे अवशेषों सहित ही हैप्पी सीडर से फसल बिजाई करने के तौर तरीकों को प्रस्तुत करते है। यहां तक कि इसके लिए वह बिना किसी शुल्क से हैप्पी सीडर से अन्य किसानों के खेतों में गेहूं बिजाई करने में मदद कर मिसाल पेश कर रहे है।
एसडीएम बोले-हरविंदर सिंह से प्रेरणा लें किसान
बुधवार को टोहाना एसडीएम आकाश शर्मा टीम के साथ किसान हरविंदर के खेत मे पहुंचे और किसान के इस कार्य को लेकर जमकर सराहना की। एसडीएम ने कहा कि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता कम होती है। ऐसे में किसानों को किसान हरविंदर सिंह को देखते हुए पराली प्रबंधन करना चाहिए।