फतेहाबाद। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी 40 और दिव्यांग प्रमाण पत्र सवालों के घेरे में आ गए हैं। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने के मामले का खुलासा होने के बाद सीएमओ डॉ. सपना गहलावत ने जांच के लिए छह डॉक्टरों की कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी में स्पेशलिस्ट भी शामिल है। कमेटी 10 दिनों के अंदर मामले की जांच करके रिपोर्ट सिविल सर्जन को देगी। जांच रिपोर्ट में ही सामने आएगा कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने में कौन-कौन शामिल रहा है।
सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पोर्टल पर जांच की तो करीब 40 दिव्यांग प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनकी असेसमेंट शीट पोर्टल पर अपलोड ही नहीं की गई है। अब जांच कमेटी इन संदिग्ध दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच करेगी। बता दें कि सोमवार को खबर उमर उजाला में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में विजिलेंस अधिकारी भी अलर्ट हो गए हैं। विजिलेंस ने संबंधित रिकॉर्ड लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा खुफिया विभाग ने भी मामले की जांच शुरू की है।
फर्जी मिलने पर दिव्यांग प्रमाण पत्र होंगे रद्द
सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत का कहना है कि जांच में जो भी प्रमाण पत्र फर्जी मिलेंगे उन्हें पोर्टल पर ही रद्द कर दिया जाएगा। इससे पहले वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम जांच करेगी कि दिव्यांग की प्रतिशत क्या होनी चाहिए और प्रमाण पत्र कितने का जारी हुआ है। इसके अलावा सिविल सर्जन ने संबंधित विभागों को भी पत्र जारी कर दिया है कि जो भी दिव्यांग प्रमाण पत्र आएं उनकी वेरिफिकेशन करवाई जाए।
सरकारी नौकरी में प्रमोशन, आरक्षण लेने के लिए बनवाए गए फर्जी प्रमाण पत्र
दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाया गया डॉक्टरों का बोर्ड जांच करता है और असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसमें बताया जाता है कि कितने प्रतिशत दिव्यांग है। इसके बाद सिविल सर्जन कार्यालय दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रतिशत के साथ जारी करता है। वहीं बताया जा रहा है कि सरकारी नौकरी में प्रमोशन, आरक्षण और पेेंशन का लाभ लेने के लिए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए गए।
दिव्यांग प्रमाण पत्र की वेरिफिकेशन हुई तो मामले का हुआ खुलासा
स्वास्थ्य विभाग के पास दिव्यांग प्रमाण पत्रों की वेेरिफिकेशन आई हुई है। इसको लेकर वेरिफिकेशन चल रही है। सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत का कहना है कि दो केस तो पुख्ता तरीके से सामने आ चुके है। मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश ही मुद्दे को सामने लेकर आए है। उन्होंने ही बताया है कि दिव्यांग प्रमाण पत्र की वेरिफिकेशन उनके पास आई तो जांच में सामने आया कि उनकी ओपीडी में संबंधित केस नहीं आया है और इसके बावजूद दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके अलावा एक अन्य केस में 50 प्रतिशत दिव्यांग बताया गया लेकिन, उसकी जगह 100 फीसदी का दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। पोर्टल पर असेसमेंट शीट ही अपलोड नहीं की गई।
कोट
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है। इसको लेकर छह डॉक्टरों की जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी मामले की जांच करके रिपोर्ट देगी, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिन दिव्यांग प्रमाण पत्रों की असेसमेंट शीट पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई वह घेरे में है और उनकी जांच करके रद्द किया जाएगा।
-डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।