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स्कूलों में एक साल बाद पहुंचा फ्लेवर दूध, 12 की जगह दो माह का मिला

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विद्यार्थियों को फ्लेवर दूध के पैकेट बांटते शिक्षक। - फोटो : Fatehabad
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सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मिड डे मील में अब एक साल बाद फ्लेवर दूध मिलने जा रहा है। शिक्षा विभाग ने एक साल बाद प्राइमरी और मिडल स्कूलों में दूध की सप्लाई भेजी है। लेकिन शिक्षा विभाग विद्यार्थियों को 12 माह की जगह दो महीने का ही दूध दे रहा है। 10 माह का फ्लेवर दूध विद्यार्थियों को मिलेगा या नहीं इसको लेकर शिक्षा विभाग ने कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है।
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प्राइमरी और मिडल स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को जुलाई और अगस्त माह का दूध दिया जा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी को आधा किलो के पैकेट दिए जा रहे है। पिछले 10 माह के दूध को लेकर फिलहाल संशय बना हुआ है।विद्यार्थियों को फ्लेवर दूध देने के लिए शिक्षा विभाग वीटा से सप्लाई लेता है और इसे स्कूलों में दी जाती है। पहले विद्यार्थियों को स्कूलों में ही फ्लेवर दूध तैयार करके दिया जाता था लेकिन कोरोना महामारी के चलते स्कूल बंद होने के कारण विद्यार्थियों को ही दूध के पैकेट दिए जा रहे है। प्रत्येक विद्यार्थी को 20 ग्राम के हिसाब से दो माह का 480 ग्राम दूध बनता है लेकिन शिक्षकों 500 ग्राम का ही पैकेट देना पड़ रहा है।
दूध भुगतान के लिए वापस मांगा था बर्तनों का बजट
शिक्षा विभाग ने करीब पांच माह पहले प्राइमरी और मिडल स्कूलों से बर्तनों के लिए जारी किए गए बजट को वापस मांग लिया था। जारी किए गए आदेशों कहा गया था कि बर्तनों के लिए स्कूलों में जो बजट आया है उसे वापस भेजा जाए, इस बजट से दूध का भुगतान किया जाएगा।
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जिले में ये हैं विद्यार्थियों
स्कूल विद्यार्थी
प्राइमरी 44269
मिडल 29674
20 ग्राम दूध का कैसे रखें हिसाब
शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को दो माह का दूध बांटने के आदेश दिए है। लेकिन दो माह का दूध सरकारी आंकड़ों में 480 ग्राम बनता है और पैकेट 500 ग्राम का है। शिक्षक विकास टुटेजा का कहना है कि अगर पैकेट खोलकर देते हैं तो 20 ग्राम दूध व्यर्थ जाएगा। ऐसे में विभाग इसको लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करें।
कोट
शिक्षा विभाग ने पिछले साल अगस्त में सप्लाई दी थी, उसके बाद अब सप्लाई भेजी गई है। पूरा एक साल सप्लाई नहीं दी गई। विद्यार्थियों को जुलाई और अगस्त माह का ही दूध दिया जा रहा है, पिछले दूध को लेकर कोई गाइडलाइन ही नहीं आई है। सरकार खुद योजनाएं बनाती है और फिर खुद ही पूरी नहीं कर पाती है। विद्यार्थियों को पिछले 10 माह का दूध भी जारी किया जाए ताकि वह पौष्टिक आहार से वंचित न रहें।
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- देवेंद्र दहिया, राज्य चेयरमैन, प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा।
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