फतेहाबाद। शहर की सड़कों के किनारे व बाजार में रेहड़ी-फड़ी लगाकर अपना गुजारा करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स के लिए वेंडिंग जोन नहीं बन पाया है। जबकि नगर परिषद ने वेंडर्स का सर्वे किए हुए लगभग पांच साल का समय बीत चुका है।
दूसरी तरफ इसका सीधा असर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ता है। वहीं वेंडर्स भी रोजाना नगर परिषद की कार्रवाई के साए में काम करने को मजबूर हैं। अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत इन स्ट्रीट वेंडर्स को कई बार हटाया जा चुका है। इस कार्रवाई में उनको काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
शहर में लगभग 850 स्ट्रीट वेंडर पंजीकृत हैं। इन दुकानदारों को नगर परिषद ने लाइसेंस और पहचान पत्र तो जारी किए गए हैं, लेकिन उन्हें वह जगह नहीं दी गई जहां वे अपना काम कर सकें। सब्जी रेहड़ी यूनियन के प्रधान सुभाष शर्मा का कहना है कि वे लंबे समय से स्थायी जगह की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने और स्ट्रीट वेंडर्स को सुरक्षित रोजगार देने के लिए वेंडर जोन का निर्माण अनिवार्य है। यदि जल्द ही नगर परिषद ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो शहर की यातायात व्यवस्था और बिगड़ सकती है। हंस मार्केट में रेहड़ी लगाने वाले वीर सिंह ने बताया कि पांच साल पहले सर्वे हुआ था, उस दौरान उम्मीद जगी थी कि अब इधर-उधर भागना नहीं पड़ेगा, लेकिन वे अभी तक भी सड़कों पर ही खड़े हैं। प्रशासन कभी जमीन की कमी बताता है तो कभी योजना की।
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15 से ज्यादा स्थानों पर रेहड़ियों से बनती है जाम की स्थिति
शहर के 15 से अधिक ऐसी जगह, जहां रेहड़ियां लगाई जाती है। इनमें थाना बाजार, बस स्टैंड के पीछे, शिवालय मार्केट और हंस मार्केट आदि शामिल हैं। स्थायी जगह न होने के कारण दुकानदार सड़कों के किनारे रेहड़ियां लगाते हैं। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को परेशानी होती है। जब भी शहर में जाम की समस्या बढ़ती है, नगर परिषद की टीम अतिक्रमण हटाने के नाम पर इन वेंडर्स का सामान जब्त कर लेती है।
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वेंडर जोन के लिए जगह का चयन करने के लिए साल 2019 में सर्वे किया गया था लेकिन जगह चिन्हित नहीं हो पाई है। पहले प्रोविजनल वेंडर जोन के लिए कमेटी बनाई थी। अब फिर से स्थायी कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में 8 रेहड़ी संचालकों को भी शामिल किया गया है। सभी की सहमति से जगह का चुनाव किया जाएगा।
-निक्की गोयल, डीपीएम, शहरी आजीविका मिशन, नगर परिषद फतेहाबाद।