जिला परिषद चेयरमैन राजेश कसवां के खिलाफ दर्ज मामले की एफआईआर पुलिस ने हर समय पोर्टल पर अपलोड कर दी है। कोर्ट रीडर की शिकायत पर पुलिस ने 5 फरवरी को मामला दर्ज किया था मगर 11 फरवरी तक एफआईआर अपलोड नहीं की थी जबकि 24 घंटे के भीतर एफआईआर ऑनलाइन करनी होती है। इसको लेकर अमर उजाला ने 12 फरवरी के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुशील बिश्नोई का आरोप था कि पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते एफआईआर अपलोड नहीं की। इस मामले को लेकर थाना प्रभारी सुरेंद्र कंबोज का कहना है कि यह एफआईआर इत्तफाकिया छूट गई थी जोकि जानकारी मिलते ही तत्काल अपलोड कर दी थी। पुलिस किसी के दबाव में काम नहीं कर रही। इस मामले में जांच अभी जारी है। जांच के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिला परिषद कार्यालय के एक हिस्से में कोर्ट के लिए जगह दी हुई है। यहां पर नाबालिग आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की सुनवाई होती है। 5 फरवरी को कोर्ट में कार्यवाही चल रही थी। आरोप है कि कार्यवाही के दौरान जिला परिषद चेयरमैन राजेश कसवां, लेखा अधिकारी दलीप व एक अन्य व्यक्ति आए और कोर्ट की कार्यवाही में बाधा डाली। विवाद ये था कि जिला परिषद कार्यालय के सामने जज की गाड़ी खड़ी थी और उक्त लोगों ने जज की गाड़ी हटाने के लिए कहा तभी विवाद हो गया और रीडर राजकुमार की शिकायत पर पुलिस ने धारा 186, 228, 353 व 34 आईपीसी के तहत मुकदमा नंबर 60 दर्ज किया था।