ढोल नगाड़ों के साथ आकर्षक झांकियां शहर की सड़कों पर घूमती नजर आई। उपायुक्त एनके सोलंकी व एसडीएम संतलाल पचार सहित तमाम उच्चाधिकारी, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्कूली बच्चों व शहरवासियों का विशाल काफिला इस भव्य यात्रा में शामिल हुआ।
संस्कृत के विद्वान और स्कूली बच्चे जहां एक तरफ श्लोक उच्चारण के माध्यम से गीता का संदेश दे रहे थे, वहीं दूसरी तरफ ढोल-नगाड़े व गाजे-बाजे के साथ बाजारों में लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे।
यात्रा संग खुद भी पैदल चलते रहे डीसी
जिला उपायुक्त एनके सोलंकी ने स्थानीय पंचायत भवन से दोपहर 2:15 बजे गीता ग्रंथ की शोभा यात्रा को रवाना किया। वे स्वयं यात्रा के साथ पैदल चलते नजर आए।
जीटी रोड से होते हुए पालकी यात्रा लाल बत्ती चौक पर पहुंची। वहां से फव्वारा रोड, थाना रोड, जवाहर चौक व डीएसपी रोड होते हुए यात्रा वापस पंचायत भवन पहुंची।
सजे-धजे रथ में सवार थी मनमोहक झांकियां
आगे आगे उपायुक्त तो उनके पीछे अधिकारियों, सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों व शहरवासियों का पैदल जत्था चल रहा था। जत्थे के पीछे गीता ग्रंथ विराजित सजा-धजा रथ धीमी गति से चल रहा था।
रथ में गीता ग्रंथ की सेवा में एक विद्वान पंडित विराजमान थे। इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के प्रतीक स्वरूप को विराजमान किया गया था।
जगह-जगह महिलाओं ने की पुष्प वर्षा
शोभा यात्रा का शहर में कई स्थानों पर धार्मिक-सामाजिक व स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा भव्य स्वागत किया गया। यात्रा पर जगह-जगह महिलाओं व शहरवासियों ने पुष्प वर्षा की।
कई संस्थाओं ने शोभा यात्रा के साथ चल रहे लोगों के लिए प्रसाद व मिष्ठान का भी प्रबंध किया हुआ था। यात्रा के स्वागत में कई जगहों पर तोरणद्वार बनाए गए थे।
शहरवासियों ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर गीता जयंती के आयोजन के लिए प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन के प्रयासों की जमकर सराहना की।
इस मौके पर एसडीएम संतलाल पचार, डीआरओ बिजेंद्र भारद्वाज, डीडीपीओ राजेश खोथ, उप निदेशक डॉ. साहिब गोदारा, डीडीए बलवंत सहारण, एडवोकेट संतकुमार, मदन गोपाल आर्य, सुभाष खुराना, महेंद्र सिंह वधवा, सहित धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्कूली विद्यार्थी व बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद थे।
गीता महोत्सव प्रदर्शनी में गीता संदेश नहीं, मछली पालन और दवाइयों का हुआ प्रचार
फतेहाबाद। पंचायत भवन में तीन दिवसीय गीता जयंती महोत्सव का उद्देश्य जन जन तक गीता का संदेश पहुंचाना था लेकिन महोत्सव में गीता की प्रदर्शनी तो कहीं नहीं दिखी लेकिन मछली खाने के लिए प्रेरित करने वाली प्रदर्शनी जरूर देखी गई
हिंदू संस्कृति की विरासत में निषेध समझा जाता है। हिंदू संस्कृति को मानने वाले विशेषज्ञ इसे हैरत मान रहे हैं।
19 से 21 दिसंबर तक तीन दिवसीय गीता जयंती महोत्सव मनाया गया।
महोत्सव में गीता का संदेश अथवा गीता का प्रचार-प्रसार जन-जन तक करना सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का उद्देश्य था। महोत्सव में विभिन्न प्रकार के 19 प्रदर्शनियों के स्टाल लगाए गए।
इन 19 स्टालों में से एक पर भी ग्रंथ गीता का स्वरूप अथवा प्रतीक विराजमान नहीं था। इसके विपरीत मत्स्य विभाग द्वारा मछली पालन व मछली सेवन को बढ़ावा देने के लिए स्टाल जरूर लगी थी।
जहां मछली उत्पादन करने के फायदे बताए जा रहे थे। स्टॉलों में गीता संदेश नाम का जिक्र तक नहीं था वहीं मछली के फायदे जरूर दिखाए गए।
इसके अलावा जिला समाज कल्याण विभाग के स्टॉल पर ही निजी कंपनी की आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रचार भी किया जा रहा था। जिसका सीधा संबंध प्राइवेट फर्म से है।
गीता जयंती समारोह में मांस-मछली का प्रचार करना, इससे भद्दा मजाक क्या हो सकता है। गीता का बहाना कर भाजपा सरकार हिंदुत्व की बात करती है और लेकिन दूसरी ओर आरएसएस का झंडा लागू करना चाहती है।
बलवान सिंह दौलतपुरिया
विधायक हल्का फतेहाबाद