एचएयू में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते कृषि मंत्री ओपी धनखड़
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गांव नागपुर की महिला सरपंच सुनीता सिहाग पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के बुलावे पर चंडीगढ़ जाएंगी। अमर उजाला ने सुनीता सिहाग से गांव के क्या मुद्दे लेकर धनखड़ से मिलेंगी, इस पर बातचीत की जिस पर उन्होंने जानकारी दी। सरपंच ने बताया कि मंत्री धनखड़ से गांव के सरकारी स्कूल में अध्यापकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षा मंत्री के सामने पैरवी करने को समेत कई समस्याओं पर उनसे बात करेंगी। सिहाग ने कहा कि गांव की ओर से मंत्री को सिरोपा और पगड़ी भेंट करेंगे।
बता दें कि नागपुर के सरकारी स्कूल में अध्यापकों की कमी के बाद पिछले सत्र में गांव की सरपंच सुनीता सिहाग ने खुद बच्चों को अंग्रेजी विषय पढ़ाने का सिलसिला शुरू किया था, जिसके बाद प्लस वन में उनके द्वारा पढ़ाए गए सभी बच्चे पास हो गए। पढ़ी-लिखी पंचायत के जिस सपने को लेकर सरकार ने चुनाव लड़ने में जो नियम कानून लगाए थे उसका फायदा देखकर सरकार गदगद हो गई। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अखबार पढ़कर इसका पता चलने पर पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने खुद सरपंच सुनीता को फोन करके उनके कार्य के लिए बधाई दी और अपने चंडीगढ़ निवास पर आकर मिलने का निमंत्रण भी दिया था।
बिजली और गंदे पानी की निकासी का मुद्दा भी रखेंगी सामने
सरपंच सुनीता सिहाग ने बताया कि 5 मई को नागपुर ब्लॉक का शुभारंभ हो सकता है। ब्लॉक का मुख्यालय गांव नागपुर के ग्राम सचिवालय में ही बना है। चूंकि गांव नागपुर में ही इस संदर्भ में कार्यक्रम प्रस्तावित है तो गांव की सरपंच सुनीता सिहाग मेजबान की हैसियत से सारे कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी है। इस कार्यक्रम के चलते वो 5 मई के बाद ही चंडीगढ़ जाकर पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से मिलेंगी। सिहाग ने बताया कि धनखड़ के सामने गांव में बिजली की कमी और गांव में गंदे पानी की निकासी का मुद्दा भी रखेंगी। सुनीता सिहाग को उम्मीद है कि जिस तरह से पंचायत मंत्री ने खुद फोन कर उनका उत्साह बढ़ाया है, उसी तरह वो उनके गांव की जायज मांग को जरूर पूरा करेंगे।
बखूबी संभालती हैं सरपंच की जिम्मेदारी, अफसरों से भी खुद ही करती हैं बातचीत
नागपुर गांव की महिला सरपंच सुनीता सिहाग सही मायनों में पढ़ी-लिखी पंचायत एवं महिला सशक्तिकरण की मिसाल मानी जाती हैं। गांव के स्कूल में अध्यापकों की कमी के बाद बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत ना आए, इसके लिए उन्होंने खुद ही गांव के स्कूल में रोजाना जाकर बच्चों की कक्षाएं लेनी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, कई और महिला सरपंचों की भांति उनके पति सरपंच प्रतिनिधि होने का दंभ नहीं भरते बल्कि गांव से जुड़े सभी मुद्दों पर सरपंच सुनीता सिहाग ही बेबाकी से ना केवल राय रखती है, बल्कि विकास कार्यों का फालोअप लेने के लिए खुद ही जाकर अधिकारियों से मिलती-जुलती हैं।