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बत्ती उतारने को तहसीलदार को नोटिफिकेशन का इंतजार, एमएलए और एसडीएम ने गाड़ी पर लगवाई नेम प्लेट

Mon, 01 May 2017 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
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VIP मानसिकता कैसे बदलेगी? - फोटो : File Photo
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केंद्र सरकार के फैसले गाड़ी से बत्ती हटाओ के बाद नेताओं, अधिकारियों लाल-पीली और नीली बत्ती तो अपनी-अपनी सरकारी गाड़ियों से उतार दी, लेकिन पद का रौब दिखाने के लिए नंबर-प्लेटों का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
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बत्ती उतारने के नियम से खफा चल रहे रतिया के इनेलो विधायक रविंद्र सिंह बलियाला ने भी अपनी सरकारी गाड़ी पर लगी बत्ती तो उतार दी, लेकिन लगे हाथों उन्होंने भी अपनी गाड़ी के आगे एमएलए लिखी पटिका लिखवा ली है। नियमानुसार तो ये पटिका भी गलत है, लेकिन जिनके हाथों में इस कानून को बनाए रखने की व्यवस्था है, आरटीए सचिव का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे एसडीएम सतबीर जांगू की खुद की सरकारी गाड़ी के आगे एसडीएम लिखी एक बड़ी पटिका है। जिले के मुखिया डीसी एनके सोलंकी एवं पुलिस कप्तान कुलदीप सिंह की सरकारी गाड़ी से भी बत्ती उतर चुकी है, लेकिन रतिया के तहसीलदार दिनेश ढिल्लों को अभी भी सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार है, इसलिए अपनी सरकारी गाड़ी से नीली बत्ती उतारने का मोह तहसीलदार साहब अभी तक त्याग नहीं पाए हैं। इनेलो विधायक बलियाला ने एक बार फिर सरकार पर बत्ती को लेकर निशाना साधा है।

स्थानीय अफसरों ने बत्ती उतारी, नाम पटिका नहीं
सरकार की ओर से लाल-पीली बत्ती उतारने के आदेश के चलते स्थानीय अधिकारियों को मजबूरन अपनी गाड़ी की बत्ती तो उतारनी पड़ी। अब तक अधिकारी अपनी गाड़ी के आगे लगी पद नाम की पटिका का मोह नहीं त्याग सके। सोमवार को आदेश के पहले दिन सचिवालय में खड़ी सभी अधिकारियों की गाड़ियों के आगे उनके पद की पटिका लगी हुई थी। सिर्फ एएसपी गंगाराम पूनियां की गाड़ी की बत्ती भी उतरी थी और उनकी गाड़ी के आगे कोई पदनाम पटिका भी नहीं दिखी। इसके अलावा फतेहाबाद एसडीएम की गाड़ी के आगे भी पटिका बदस्तूर लगी हुई है। इसके अलावा आरटीए दफ्तर की गाड़ियों के आगे भी उनके दफ्तर की पटिका लगी हुई है। एडीसी की सरकारी गाड़ी की बत्ती तो पहले ही उतर चुकी है, लेकिन उनकी गाड़ी की पटिका अभी तक लगी हुई है।
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कई अफसरों ने पहले ही उतार दी थी गाड़ी की बत्ती
हालांकि सरकार के निर्देशानुसार एक मई से सरकारी गाड़ी से बत्ती उतारनी थी, लेकिन जिले के कई अधिकारियों ने एक सप्ताह पहले ही अपनी गाड़ी से बत्ती उतार दी थी। जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश खोथ अब बिना बत्ती और बिना नाम पटिका वाली सामान्य दिखने वाली सरकारी गाड़ी में चलते हैं। उनके मातहत काम करने वाले बीडीपीओ को भी उन्होंने बत्ती उतारने का निर्देश दिया है। खुद एडीसी ने भी कई दिन पहले बत्ती उतरवा दी थी, लेकिन गाड़ी के आगे नाम पटिका अभी तक बरकरार है।

रतिया-टोहाना में एसडीएम की गाड़ी की बत्ती उतरी, तहसीलदार को नोटिफिकेशन का इंतजार
रतिया में एसडीएम की गाड़ी से सरकारी बत्ती उतर चुकी है, लेकिन उसी परिसर में बैठने वाले तहसीलदार दिनेश ढिल्लों की सरकारी गाड़ी पर अभी तक नीली बत्ती लगी हुई है। इस बारे में पूछे जाने पर तहसीलदार ढिल्लों ने साफ तौर पर कहा कि अभी तक बत्ती उतारने का नोटिफिकेशन नहीं आया है। नोटिफिकेशन आते ही गाड़ी से बत्ती उतार देंगे। उधर, रतिया के ही इनेलो विधायक रविंद्र बलियाला ने एक बार फिर प्रदेश और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कानून का सम्मान करते हुए उन्होंने अपनी गाड़ी की बत्ती उतार दी है, लेकिन सरकार की मंशा सही नहीं है। सरकार जनता का ध्यान मुद्दों से हटवाना चाहती है। अगर सरकार को वास्तव में वीआईपी कल्चर से परेशानी है तो उसे सुरक्षा में होने वाला भारी-भरकम खर्च कम करवाना चाहिए। सिर्फ बत्ती उतरवाने से कुछ नहीं होगा। 
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