16 मार्च को नगर परिषद पार्षदों की बैठक तय है। इस बैठक में शहर के विकास कार्यों को लेकर अहम प्रस्ताव पास किए जाने की संभावना है। मौजूदा नप कमेटी के गठन के बाद एक साल से भी कम समय में ये चौथी बैठक होगी लेकिन नगर परिषद की पहली औपचारिक बैठक के दौरान रखे गए कई मुद्दे अभी तक अधूरे हैं। इन मुद्दों पर अभी तक जमीनी स्तर पर काम शुरू भी नहीं हो सका है। इनमें सफाई से लेकर माइक सिस्टम और खेमा खाती रोड का नाम बदलना भी शामिल है। नवंबर में हुई बैठक में पास हुए एजेंडे में से महज दो काम ही पूरे हो सके हैं और जनहित के बाकी सभी मुद्दे अधूरे ही हैं।
कई फैसले लिए थे, जो अब तक नहीं हुए पूरे
16 नवंबर को हुई नगर परिषद की बैठक में कई फैसले लिए गए थे। उसमें सबसे महत्वपूर्ण था कि नगर परिषद के लिए चार टाटा एस गाड़ियों की खरीद करना। इसके लिए बाकायदा सात पार्षदों की एक कमेटी बनाई गई थी, जिसमें अनीता कुक्कड़, गुरचरण सिंह, विनोद कुमारी मिड्डा, ज्योति मेहता, नरेश बजाज, पिंकी ग्रोवर एवं राकेश गंभीर शामिल थे। लेकिन लगभग पांच माह बीतने के बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। इसी तरह इन्हीं सात पार्षदों की कमेटी को ही नगर परिषद बैठक हाल में माइक सिस्टम लगाने को मंजूरी दी गई थी लेकिन माइक सिस्टम तक का इंतजाम नहीं हो सका है।
खेमा खाती चौक और मार्ग का नाम बदलना पेंडिंग
इसी बैठक में दो सड़कों के नाम बदलने का एजेंडा रखा गया था जिसमें से एक सड़क का नाम बदल दिया गया जबकि दूसरी सड़क का नाम बदलने का मुद्दा पांच माह बाद भी लंबित है। इस बैठक में पार्षद नरेश बजाज ने प्रस्ताव रखा था कि चार मरला कॉलोनी के माल रोड का नाम बदलकर दिवंगत पूर्व पार्षद राजू मुंजाल के नाम पर रखा जाए, जिसके बाद उसी माह इस सड़क का नाम बदलकर यहां पर बाकायदा बोर्ड भी लगा दिया गया। दूसरी ओर इसी बैठक में पार्षद रानी देवी ने प्रस्ताव रखा था कि खेमा खाती चौक और खेमा खाती रोड़ का नाम बदलकर रविदास मार्ग रखा जाए। इस प्रस्ताव को हाउस ने सर्वसम्मति से मंजूर किया था लेकिन पांच माह बीतने के बाद भी ये मामला लंबित ही है। इसके अलावा चार मोबाइल टायलेट का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन फिलहाल इसके लिए टेंडर ही दिए गए हैं। चार मोबाइल टायलेट अभी नगर परिषद प्रशासन को हैंडओवर नहीं हुए।
मल्टीलेवल पार्किंग की लागत से बची ग्रांट को लेकर भी स्थिति साफ नहीं
नगर परिषद ने पहले मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके लिए 15 करोड़ की राशि मंजूर की गई थी लेकिन बाद में सरकार ने इसे बनाने का जिम्मा लोक निर्माण विभाग को दे दिया, जिसने महज साढ़े आठ करोड़ में पार्किंग को तैयार करके नगर परिषद को हैंडओवर कर दिया। अब लोक निर्माण विभाग के पास नगर परिषद की 15 करोड़ ग्रांट में से लगभग साढ़े छह करोड़ की ग्रांट लंबित पड़ी है। नवंबर में हुई बैठक में प्रस्ताव पास किया गया था कि इस ग्रांट को वापस लेने के लिए सरकार से बात की जाएगी, लेकिन अब तक ये मामला भी लंबित चला आ रहा है।
नगर परिषद बैठक में पारित होने वाले प्रस्तावों को पूरा करने की एक प्रक्रिया है। उसी प्रक्रिया के तहत सारे काम होते हैं। जल्द ही सभी काम संपन्न होंगे। -ओपी सिहाग, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, फतेहाबाद ।