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पंजाब बॉर्डर पर पैनी नजर, राजस्थान सीमा तस्करों के हवाले

Mon, 11 Apr 2016 12:31 AM IST
अमित रूख्ााया/अमर उजाला, फतेहाबाद
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तस्‍करी - फोटो : fatehabad
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स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और एसपी संगीता कालिया के बीच नशे की तस्करी को लेकर विवाद की जड़ बने पंजाब बॉर्डर पर भले ही फतेहाबाद पुलिस ने अपनी नजरें पैनी कर ली हों, लेकिन जिले के दूसरे छोर पर लगती राजस्थान सीमा शायद तस्करों के लिए खुली छोड़ दी है। फतेहाबाद से वाया भट्टू होते हुए जिले के साथ लगती राजस्थान सीमा के पहले गांव महराणा तक के लगभग 35 किलोमीटर से अधिक के रास्ते पर एक भी पुलिस नाका नहीं है। इस रूट पर पड़ने वाले गांवों के लोगों की मानें तो उन्होंने यहां दिन या रात के समय कभी पुलिस को गश्त करते हुए भी नहीं देखा।
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35 किलोमीटर के रूट पर आधा दर्जन गांव
जिला मुख्यालय से जिले की सीमा से लगते पहले राजस्थानी गांव महराणा की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। इस दूरी में तकरीबन आधा दर्जन बड़े गांव हैं। इनमें फतेहाबाद शहर के साथ लगते भोड़ियाखेड़ा को छोड़ दिया जाए तो भी सात बड़े गांव इस रास्ते पर आते  हैं। लेकिन इस पूरे रास्ते में एक भी पुलिस नाका नहीं है। भट्टू से महराणा के बीच तीन पेट्रोल पंप हैं।

इन पर भी सुरक्षा का कोई तामझाम यहां नजर नहीं आता। हैरत इस बात को लेकर भी होती है कि 13 अप्रैल को जाट समुदाय के लोगों ने फतेहाबाद में रैली की घोषणा कर रखी है और इस रूट पर पड़ने वाले मानावाली, ढिंगसरा, मेहूवाला, भट्टू, ढाबीकलां, रामसरा और दैयड़ आदि सभी गांव जाट बहुल इलाके हैं। बावजूद इसके, इन गांवों में सुरक्षा के कोई इंतजाम ना होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं।
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पुलिस चौकी पर लटका ताला, अकसर दिखते हैं संदिग्ध
फतेहाबाद सीमा से राजस्थान में प्रवेश करते ही पहले गांव महराणा में अपराधियों के लिए शानदार व्यवस्था मालूम पड़ती है। दरअसल इस गांव में कहने को तो पुलिस चौकी है, लेकिन इस चौकी पर अक्सर ताला ही लटका रहता है। हनुमानगढ़ जिले के तहत आने वाले इस गांव के ग्रामीणों ने बताया कि हरियाणा नंबर के कुछ संदिग्ध वाहन इस गांव के रास्ते राजस्थान के अन्य इलाकों में जाते हुए देखे जाते हैं।

कई बार संदिग्ध लोग पैदल ही फतेहाबाद की सीमा से महराणा गांव में प्रवेश करते देखे गए हैं। पिछले तीन से चार माह से घुसपैठ ज्यादा हो गई है। बता दें कि राजस्थान के कुछ इलाकों में चूरापोस्त की खेती की जाती है। बाकायदा कुछ इलाकों में चूरापोस्त के ठेके भी खुले हैं। वहां सरकारी रेट पर चूरापोस्त लाकर फतेहाबाद और आस पास के इलाकों में महंगे दामों पर आराम से बेची जा सकती है। इतना ही नहीं, पंजाब बॉर्डर पर मेडिकल नशे पर सरकारी सख्ती के चलते अब राजस्थानी सीमा इसकी चपेट में आ गई है, जिस ओर अभी तक प्रशासन का कोई पहरा ही नहीं है।

बॉर्डर पर नाका नहीं, लेकिन खुल गया है ठेका
अब इसे व्यवस्था की मार ही कहेंगे कि गांव रामसरा से आगे जाते हुए जिस जगह पर हरियाणा के हिस्से की सड़क खत्म होती है, उस जगह पर होना तो चाहिए था पुलिस नाका। लेकिन नाका लगाने की जरूरत शायद पुलिस प्रशासन ने नहीं समझी। अब उस जगह पर शराब का ठेका खुलने जा रहा है। इसके लिए बाकायदा ठेके  का निर्माण भी कर दिया गया है।

राजस्थान के ग्रामीणों की जुबानी
महराणा गांव में पुलिस चौकी है तो सही लेकिन महज नाम की है। अधिकतर समय चौकी पर ताला लटकता है और पुलिस कभी-कभार ही आती है।
शेर सिंह, ग्रामीण, महराणा गांव, राजस्थान

नशे के तस्करी के बारे में तो कुछ नहीं कह सकता, लेकिन इतना जरूर है कि पिछले तीन-चार माह से यहां पर संदिग्ध लोगों की आवाजाही बढ़ गई है।
सत्यवान, ग्रामीण, महराणा गांव, राजस्थान

हरियाणा निवासियों की कहानी
इस इलाके में पुलिस की गश्त बहुत कम होती है। पुलिस गश्त नियमित रहेगी तो अपराधों और तस्करी पर अंकुश अपने आप लग जाएगा।
हस्मत खान, ग्रामीण, सीमावर्ती गांव हरियाणा

संदिग्ध लोग दिखते ही रहते हैं आजकल। गांव सड़क पर है तो नियमित रूप से आने जाने वालों की पहचान हो जाती है लेकिन पिछले काफी समय से कुछ अंजान लोग भी इस रास्ते से आते-जाते दिखे हैं।
सुरेंद्र कुमार, ग्रामीण, सीमावर्ती गांव, हरियाणा

क्या कहते हैं डीएसपी
इस बारे में डीएसपी विजय जाखड़ ने बताया कि सिर्फ नाका लगाना ही इस समस्या का समाधान नहीं है। मुखबिरों रूपी स्रोतों को पक्का किया गया है। नशे की तस्करी होने की सूचना तुरंत मिलती है और कार्रवाई होती है।
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