सफेद मक्खी की मार से भयभीत सरकार ने इस बार बीटी कॉटन के बीज को अप्रूवल नहीं दी है। नरमे की बिजाई का सीजन चल रहा है, लेकिन बाजार में अभी तक बीज ही उपलब्ध नहीं हुआ है। कुछेक किसान पंजाब से बीज लाकर बीटी कॉटन की बिजाई कर रहे हैं जबकि अन्य किसान यहां के बीज विक्रेताओं के यहां चक्कर काटने को मजबूर हैं। एचएसडीसी के अधिकारी इस बात की पुष्टि भी करते हैं कि उनके यहां 200 से ज्यादा किसान प्रतिदिन बीटी कॉटन का बीज लेने के लिए आते हैं।
पिछली बार 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर बीटी कॉटन की बिजाई की गई थी। सफेद मक्खी की बिमारी के चलते पूरी की पूरी फसल नष्ट हो गई और किसान माथे पर हाथ रखकर बैठ गया। अब गेहूं निकल रहा है और नरमे की बिजाई चल रही है, लेकिन किसानों को बीटी कॉटन का बीज नहीं मिल रहा। कारण है पिछली बार से डरी सरकार और कृषि विभाग बीज की वैरायटी को स्वीकृत नहीं दे रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने बीटी कॉटन की 32 वैरायटी के बीज पास करके निदेशक कृषि विभाग को भेज रखे हैं, लेकिन अभी तक बीज की किस्मों को अनुमति नहीं मिल पाई। इस कारण बीज कंपनियां डिस्ट्रीब्यूटरों के पास बीज भेजने को असमर्थ हैं। हालांकि, सीएनएफएफ के पास बीज स्टॉक है। अनुमति के बाद ही बीज सभी डिस्ट्रीब्यूटरों पर सप्लाई होगा।
फतेहाबाद में बीज की सरकारी एजेंसी हरियाणा सीड्स डेवलेपमेंट कार्पोरेशन (एचएसडीसी), (एचएलआरडीसी) हरियाणा भूमि विकास प्राधिकरण तथा 20 प्राइवेट कंपनियों के बीज विक्रेता हैं, लेकिन इनमें कहीं भी बीज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कुछ किसान पंजाब से बीज लाकर बिजाई कर रहे हैं जो उन्हें मंहगा पड़ रहा है।
मानावाली के किसान मनदीप सिंह ने कहा कि सरसों के बाद बीटी कॉटन की बिजाई करनी थी, लेकिन बीज न मिलने से जमीन सूख रही है। अब तो एक-एक दिन भारी पड़ रहा है।
डीडीए डॉ. बलवंत सहारण ने बताया कि बीटी कॉटन बीज के एक पैकेट में 400 ग्राम बीज के साथ 120 ग्राम एक अलग पैकेट होता है। किसान 400 ग्राम के पैकेट की बिजाई कर लेते हैं, जबकि 120 ग्राम वाले छोटे पैकेट को फेंक देते हैं। किसानों का मानना है कि 120 ग्राम थैली के बीज से उत्पादन कम होगा, जबकि असलियत यह है कि 120 ग्राम की थैली में जो पौधे लगते हैं, सुंडी उन पौधों को पसंद करती है। अगर इसकी बिजाई साथ हो तो सुंडी बीटी कॉटन पर न लगकर इस पौधों पर लगेगी। इससे किसानों की फसल बच जाएगी। पौधों को बीमारी से बचाने के लिए यह एक अलग तरह की तकनीक है।
बीज नहीं पहुंचा तो होगी मारामारी
नरमा बिजाई का समय बीतता जा रहा है। सरसों की कटाई के बाद काफी समय से जमीन खाली पड़ी है। किसान बीज के लिए धक्के खा रहे हैं। यहां तक कि पंजाब से भी बीज खरीदकर लाने को मजबूर हो रहे हैं। बीज आने में देरी घातक साबित हो सकती है क्योंकि जैसे ही बीज विक्रेताओं के पास पहुंचेगा लेने वालों की मारामारी हो जाएगी।
अभी एचएसडीसी के पास बीज नहीं आया। प्रतिदिन 200 किसान बीज खरीद के लिए आते हैं।
भजन सिंह, सेल्स मैनेजर, एचएसडीसी
अप्रूवल नहीं मिलने के कारण अभी बीज नहीं मंगवाया जा सकता। अप्रूवल आते ही बीटी कॉटन का बीज मार्केट में आ जाएगा।
सुरेंद्र मित्तल, एसके ट्रेडर्स एवं डिस्ट्रीब्यूटर बीज विक्रेता
निदेशक की तरफ से अभी अप्रूवल आ गई है। सोमवार तक उम्मीद है कि सभी बीज विक्रेताओं के यहां बीज मिलना शुरू हो जाएगा।
डॉ. बलवंत सिंह सहारण, उपनिदेशक, कृषि विभाग फतेहाबाद