स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में सड़कों व गलियों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को आश्रय उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से गांव ढिंगसरा की गो चारण भूमि पर गो-अभयारण स्थापित किया जाएगा। आगामी एक नवंबर से इस गो अभयारण में पशुओं को एकत्रित करना शुरू कर दिया जाएगा। उपायुक्त एनके सोलंकी की अध्यक्षता में वीरवार को लघु सचिवालय के बैठक कक्ष में जिला भर के गो शालाओं के संचालकों व प्रतिनिधियों की बैठक में यह जानकारी दी गई। इस संबंध में ढिंगसरा के सरपंच अशोक जाखड़ ने गांव की कुल 150 एकड़ गोचरण भूमि पर गो अभयारण बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिस पर उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी करें और ढिंगसरा में गोअभयारण स्थापित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य करे।
गांव ढिंगसरा की 50 एकड़ भूमि पर गो अभयारण बनाया जाएगा। सरपंच अशोक जाखड़ ने बताया कि उनका गांव शहर फतेहाबाद व भट्टू के नजदीक है। इस कारण बेसहारा पशु गांव ढिंगसरा में किसानों की फसलें खराब कर रहे हैं और इनसे सड़कों पर दुर्घटनाएं भी घट रही हैं।
गांव व जिले हित के मद्देनजर प्रशासन गांव में गोचर भूमि पर गो अभयारण बना सकता है। बैठक में सभी ने सरपंच के इस कदम की सराहना की। सोलंकी ने सभी गो शाला प्रतिनिधियों से भी कहा कि वे बेसहारा घूम रहे पशुओं को अपनी आवश्यकता अनुसार गो शालाओं में रखें। उन्होंने कहा कि यह सभी की समस्या है और गो शालाओं की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार द्वारा उन्हें जरूरत सहायता भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
उपायुक्त ने जिलावासियों से भी आग्रह किया है कि वे बेसहारा पशुओं को आश्रय देने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने पंचायत विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे जिला के अन्य गांवों में भी गो चरण भूमि का चयन करें ताकि बेसहारा पशुओं को वहां आश्रय दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि जिला के गांव बीघड़ व धारनियां में ऐसी भूमि का सर्वे किया गया है और वहां भी आवश्यकतानुसार बेसहारा पशुओं को रखा जाएगा। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. जेके आभीर, जिला राजस्व अधिकारी बिजेन्द्र भारद्वाज, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश खोथ, पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग के उप निदेशक डॉ. काशी राम, गो शाला एसोसिएशन के प्रधान राम कुमार ढांड, सरपंच अशोक जाखड़ सहित विभिन्न गो शालाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।