भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद धड़ाम से गिरे नरमे के भाव अब एक बार फिर से पटरी पर लौटने लगे हैं। करीब एक माह पहले जहां नरमे के भाव 4800 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गिरे थे, वे अब सुधरकर 5400 के पार पहुंच गए हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि नरमे के भाव 6 हजार तक पहुंच जाएंगे। फतेहाबाद की मंडी में इस समय तक 65 हजार क्विंटल नरमे की आवक हो चुकी है जो अब तक की सबसे ज्यादा है जबकि बीते वर्ष अब तक महज 21 हजार क्विंटल ही आवक हुई थी। कॉटन मिल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुशील मित्तल के अनुसार नरमे के भाव में अभी और तेजी आएगी।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद औंधे मुंह गिरे थे दाम
इस सीजन का नरमा जब मंडी में आया तो नरमे के भाव 5800 प्रति क्विंटल थे। हालांकि भारतीय सेना द्वारा पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया। इससे कपास व्यापारी पाकिस्तान को नरमा निर्यात करने से पीछे हट गए। 15 अक्तूबर को नरमे के भाव 4800 रुपये प्रति क्विंटल आ गए। इससे किसानों को काफी ज्यादा नुकसान हो गया। हालांकि मंडी में उस समय नरमा आना शुरू ही हुआ था। अधिकांश किसानों ने नरमे के गिरते भावों को देखकर नरमा बेचने से हाथ खींच लिया और नरमे का स्टॉक करना शुरू कर दिया। अब दीवाली के बाद नरमे की आवक में एकाएक तेजी आ गई है।
पिछली बार पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में नरमे की फसल पर सफेद मक्खी ने आक्रमण कर दिया था, जिस कारण पूरी फसल तबाह हो गई थी। स्पिनिंग और टेक्सटाइल मिलों के पास माल नहीं होने से नरमे के भाव इसी साल अगस्त महीने में 6500 रुपये पार कर गए थे। अब नई फसल आई तो किसानों को भाव 5800 रुपये मिला और बाद में जब भाव गिरे तो किसानों को मजबूरन 4800 रुपये का भाव भी लेने को मजबूर हुए। महज दो सप्ताह में नरमे के भाव में 1700 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट से व्यापारियों और किसानों दोनों में हड़कंप मच गया। फतेहाबाद के कॉटन ब्रोकरों का मानना है कि पाकिस्तान के साथ तनाव के चलते रूई के भाव गिर गए थे। अब परिस्थितियां अनुकूल होते ही नरमे के भाव फिर ऊंचाई पर आने लगे हैं।
पेमेंट फंसने के डर से कीमत में आई थी गिरावट
कॉटन मिल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुशील मित्तल के अनुसार रूई के दामों में पांच सौ रुपये प्रति मन की कमी आने से नरमे के भाव में कमी आई थी। अब रूई के भाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनुसार चल रहे हैं जिस कारण नरमे के भाव भी अच्छे मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगस्त तक टेक्सटाइल मिलों में माल नहीं था जिस कारण मजबूरन उन्हें 6500 रुपये का भाव देना पड़ा। मित्तल की मानें तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनुसार अभी भाव और बढ़ सकते हैं।
कॉटन ब्रोकर प्रदीप कुमार के अनुसार पंजाब-हरियाणा से पाकिस्तान को करीबन 25 हजार गांठ निर्यात होती है। तनाव से व्यापारियों को भय में डाल दिया। उन्हें भय हो गया कि नरमा जाने के बाद पेमेंट फंस सकती है और इसका सीधा असर बाजार पर भी पड़ा। लेकिन अब भाव फिर 54 सौ से अधिक हो चुके हैं जिससे व्यापारियों और किसानों , दोनों को फायदा है।
रकबा 20 हजार हेक्टेयर गिरा, लेकिन बंपर हुई आवक
कृषि उपनिदेशक बलवंत सहारण ने बताया कि पिछली बार करीबन 85 हजार हेक्टेयर भूमि पर नरमे की बिजाई हुई थी। सफेद मक्खी के प्रकोप के बाद इस बार रकबा कम होकर 65 हजार हेक्टेयर रह गया था।
मार्केट कमेटी सचिव दिलावर सिंह के अनुसार नरमे के भाव अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करते हैं, लेकिन इस बार फतेहाबाद में रिकार्ड तोड़ पैदावार हुई है। इस बार 68 हजार क्विंटल नरमे की आवक हुई है। जबकि बीते वर्ष महज 21 हजार क्विंटल ही नरमा मंडी में आया था। सचिव के अनुसार इस बार मंडी के राजस्व में 24 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई है।